श्रीनगर, 10 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि प्रवासियों के लिए प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में से कोई भी बेघर नहीं है।
वे घाटी में अलग-अलग विभागों में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिन्हें प्रवासियों के लिए प्रधानमंत्री के पैकेज के तहत नियुक्त किया गया था।
इन कर्मचारियों का कहना था कि घाटी में काम करते समय उनमें से कई के पास रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने घाटी में तैनात प्रवासी कर्मचारियों के रहने के लिए घाटी के अलग-अलग जिलों में गेट वाली सुरक्षित आवास व्यवस्था बनाई है। फ्लैट वाली इन बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा सुरक्षा बल करते हैं।
घाटी में ड्यूटी कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के दावे को गलत बताते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, "कौन सा कश्मीरी पंडित बिना घर के है? उनमें से कोई भी बेघर नहीं है। जहां भी ट्रांजिट आवास तैयार किए गए हैं, उन्हें घर दिए गए हैं। बिना किसी कारण के विरोध करना और दूसरी चीजें करना एक चलन बन गया है। अगर किसी को घर की जरूरत है तो हमें बताएं। बाकी लोगों को पहले ही घर दिए जा चुके हैं।"
पीएम स्पेशल पैकेज के तहत घाटी में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के साथ समस्या यह है कि उनके परिवार जम्मू और दूसरी जगहों पर रहते हैं, जबकि उन्हें घाटी में सुरक्षित आवासों में रहना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनमें से ज्यादातर (कश्मीरी पंडित) कई कारणों का हवाला देते हुए घाटी से बाहर पोस्टिंग चाहते हैं।
कश्मीर घाटी में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें गंभीर सुरक्षा जोखिमों, टारगेटेड धमकियों और जम्मू में ट्रांसफर की मांग वाले विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ता है।
इन कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें आतंकवादी समूहों और 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) और 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' (यूएलसी) जैसे प्रॉक्सी संगठनों से धमकियां मिलती हैं।
खबरों के मुताबिक, इन आतंकवादी संगठनों ने प्रधानमंत्री के पुनर्वास पैकेज के तहत नियुक्त खास कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के नाम वाली 'हिट लिस्ट' जारी की थी।
प्रवासी कर्मचारियों का कहना है कि हालिया धमकी भरे पत्रों में कर्मचारियों के नाम, घर के पते, फोन नंबर और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर जैसी निजी जानकारी लीक हो गई है, जिससे डर बढ़ गया है।
इन कर्मचारियों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किए हैं और ट्रांसफर पर लगी रोक को चुनौती देने के लिए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) का दरवाजा खटखटाया है। वे घाटी में सुरक्षा की स्थिति सुधरने तक जम्मू में ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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