बेंगलुरु, 23 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि जिस तरह लोग अपने घरों की देखभाल करते हैं, उसी तरह मठों और आध्यात्मिक संस्थानों का भी संरक्षण और संवर्धन किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने यह बात कनकपुरा के देगुला मठ के प्रमुख श्री मुम्मड़ी निर्वाण स्वामीजी को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कही। श्री निर्वाण स्वामीजी का सोमवार को निधन हो गया था।
शिवकुमार ने कहा कि उनके परिवार का इस मठ से गहरा आध्यात्मिक संबंध रहा है। उन्होंने बताया, "मेरी मां अक्सर कहती हैं कि मेरा मूल नाम केम्पेगौड़ा रखा गया था, लेकिन शिवगिरि परंपरा के आशीर्वाद से बाद में मेरा नाम शिवकुमार रखा गया। मेरा हमेशा से धार्मिक संस्थाओं और मठों से विशेष लगाव रहा है। हमारे बुजुर्गों ने सिखाया है कि जैसे हम अपने घरों की देखभाल करते हैं, वैसे ही मठों और आध्यात्मिक संस्थानों का भी संरक्षण करना चाहिए।"
मुख्यमंत्री ने देगुला मठ परिसर में स्वामीजी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनकी पादुकाओं को नमन किया। स्वामीजी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने तीन राउंड की सलामी दी। बाद में शिवकुमार ने मठ के कनिष्ठ स्वामी को राष्ट्रीय ध्वज सौंपा।
राष्ट्रीय ध्वज सौंपते समय शिवकुमार भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने दोबारा स्वामीजी की पादुकाओं को नमन किया और कनिष्ठ स्वामी का आशीर्वाद लिया। इस भावुक दृश्य को देखकर कई श्रद्धालु भी भावुक हो उठे।
बाद में मुख्यमंत्री ने स्वामीजी की गद्दी पर जाकर विभूति अर्पित की और पूजा-अर्चना की।
अपने भावुक होने के बारे में पूछे जाने पर शिवकुमार ने कहा, "यह एक भक्त और ईश्वर के बीच का संबंध है।"
श्रद्धालुओं और मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वामीजी की सादगी और स्नेहपूर्ण स्वभाव को याद किया। उन्होंने बताया कि एक चुनाव से पहले, जब स्वामीजी अस्वस्थ थे और बिस्तर पर थे, तब भी उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप उन्हें कुछ नकद राशि देते हुए कहा था कि यह चुनावी खर्च में उनका छोटा-सा योगदान है।
शिवकुमार ने कहा कि उनके परिवार और देगुला मठ का संबंध कई पीढ़ियों पुराना है।
उन्होंने कहा, "हमारे परिवार और इस मठ का रिश्ता सैकड़ों वर्षों पुराना है। मेरे दादा के समय से ही इस संस्थान के वरिष्ठ संत हमारे घर आते रहे हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर आशीर्वाद देते रहे हैं। उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहा है।"
मुख्यमंत्री ने स्वामीजी को आध्यात्मिक प्रकाशस्तंभ बताते हुए समाज के प्रति मठ के योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा, "सरकारों द्वारा भोजन, शिक्षा और आश्रय की व्यवस्था शुरू करने से बहुत पहले देगुला मठ और सिद्धगंगा मठ जैसी संस्थाएं समाज सेवा कर रही थीं। श्री निर्वाण स्वामीजी ने 86 वर्षों का जीवन लोगों के मार्गदर्शन और सेवा में समर्पित किया। करीब 700 वर्षों से यह मठ जाति और धर्म से ऊपर उठकर सेवा का प्रतीक बना हुआ है।"
उन्होंने कहा कि इस मठ से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों से पढ़े हुए अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, उद्यमी और पेशेवर आज दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं और पूर्व विद्यार्थियों को एक मंच पर लाकर मठ की सामाजिक सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुराना मैसूर क्षेत्र में देगुला मठ का विशेष महत्व है और यह कर्नाटक की प्रमुख धार्मिक संस्थाओं में से एक है।
शिवकुमार ने कहा, "बसवन्ना के आदर्श और दिवंगत स्वामीजी की सेवा परंपरा आगे भी जारी रहेगी। कनिष्ठ स्वामी के मार्गदर्शन में हम शिक्षा, अन्नदान और सामाजिक सेवा की इस विरासत को आगे बढ़ाएंगे।"
राजकीय सम्मान देने के अवसर को सौभाग्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे श्री निर्वाण स्वामीजी को राजकीय सम्मान देने का अवसर मिला। हम सभी श्रद्धालुओं और कनिष्ठ स्वामी के साथ मिलकर इस संस्थान की परंपराओं, मूल्यों और विरासत को संरक्षित रखेंगे।"
स्वामीजी के अंतिम संस्कार में कर्नाटक और पड़ोसी राज्य तमिलनाडु से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
--आईएएनएस
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