गांधीनगर, 6 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात में वार्षिक रथ यात्रा से पहले कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चलाए गए अभियान के तहत अहमदाबाद सिटी पुलिस ने जोन 7 में 24 घंटे के स्पेशल ऑपरेशन में 190 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें दो ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं, जो 21 और 20 वर्ष से वांछित थे।
'ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0' नाम का यह ऑपरेशन जोन 7 के तहत आने वाले आठ पुलिस स्टेशनों में 5 जुलाई की सुबह 8 बजे से 6 जुलाई तक चलाया गया। इसे डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (जोन 7) शिवम वर्मा द्वारा तैयार किए गए एक खास एक्शन प्लान के तहत अंजाम दिया गया।
पुलिस के अनुसार, 43 टीमों में कुल 341 अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए थे, जिनमें आठ पुलिस इंस्पेक्टर, 37 पुलिस सब-इंस्पेक्टर और 261 पुलिसकर्मी शामिल थे।
इन टीमों ने फरार आरोपियों, गैर-जमानती वारंट वाले अपराधियों, शहर से बाहर निकाले गए अपराधियों, जेल से फरार कैदियों, शराबबंदी कानून तोड़ने वालों और नशे में गाड़ी चलाने वालों को निशाना बनाया।
अलग-अलग टीमों ने ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल सर्विलांस का इस्तेमाल करके उन संदिग्धों का भी पता लगाया, जिनके अहमदाबाद से बाहर या दूसरे राज्यों में होने की आशंका थी।
गिरफ्तार किए गए 190 लोगों में से 83 फरार आरोपी थे, जो चल रही जांच में वांछित थे। पांच शहर से बाहर निकाले गए अपराधी थे। 54 गैर-जमानती वारंट के तहत वांछित थे, 11 पर नशे में गाड़ी चलाने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत मामला दर्ज किया गया था और 28 को शराबबंदी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में एक 22 वर्ष से ज्यादा समय से फरार था। लंबे समय से लंबित मामलों में गिरफ्तार लोगों में एक ऐसा व्यक्ति भी शामिल है, जो 2005 से सैटेलाइट पुलिस स्टेशन द्वारा नकली नोटों के मामले में वांछित था। वह 21 वर्ष तक फरार रहने के बाद जोन की लोकल क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार किया गया।
एक अन्य आरोपी, जो 2006 के चोरी के मामले में वेजलपुर पुलिस स्टेशन द्वारा वांछित था, 20 वर्ष तक गिरफ्तारी से बचने के बाद पकड़ा गया। पुलिस ने बताया कि उसका पता उत्तर प्रदेश में चला।
पुलिस ने यह भी बताया कि घर में सेंधमारी के मामले से जुड़ा एक आरोपी 10 वर्ष से ज्यादा समय से वांछित था और उसे मृत मान लिया गया था।
तीन अन्य लोग धोखाधड़ी और घर में सेंधमारी के मामलों में तीन वर्ष से ज्यादा समय से फरार था, जबकि 17 अन्य लोग धोखाधड़ी, जुआ, शराबबंदी कानून तोड़ने, घर में सेंधमारी, शरीर के खिलाफ अपराध, महिलाओं के खिलाफ अपराध, मंदिर में चोरी और जाली दस्तावेजों जैसे मामलों में एक वर्ष से ज्यादा समय से गिरफ्तारी से बच रहे थे।
इस ऑपरेशन के तहत, जांच करने वालों ने पिछले पांच वर्षों में फरार आरोपियों और लंबे समय से लंबित मामलों वाले अपराधियों की लिस्ट तैयार की, ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल इनपुट के आधार पर छापे मारे और अदालतों द्वारा वांछित और चल रही जांच में शामिल संदिग्धों पर निगरानी बढ़ाई।
पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की, जिन पर शहर से बाहर निकाले जाने के आदेश का उल्लंघन करने, पैरोल, फरलो या अंतरिम जमानत के बाद सरेंडर न करने और जिनके खिलाफ पीएएसए वारंट लंबित थे, के आरोप थे। अहमदाबाद के बाहर भी आरोपियों का पता लगाने के लिए विशेष प्रयास किए गए।
पुलिस ने अहमदाबाद शहर और ग्रामीण इलाकों, राजकोट, कच्छ, जूनागढ़, मेहसाणा, गांधीनगर और बनासकांठा के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ऑपरेशन चलाने से पहले केस डायरी की जांच की और संदिग्धों, सह-आरोपियों और उनके साथियों के बारे में जानकारी जुटाई।
एंट्री और एग्जिट पॉइंट और अन्य संवेदनशील जगहों पर ब्रेथ एनालाइजर का इस्तेमाल करके वाहनों की जांच की गई, जबकि इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर संदिग्ध शराब तस्करी नेटवर्क के खिलाफ छापे मारे गए।
इसको लेकर डीसीपी शिवम वर्मा ने कहा कि यह ऑपरेशन इसलिए शुरू किया गया, क्योंकि रथ यात्रा से पहले पुलिस हाई अलर्ट पर थी।
वर्मा ने कहा, "पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के मार्गदर्शन में और चल रही रथ यात्रा को देखते हुए, पुलिस हाई अलर्ट पर है। इसके तहत जोन 7 पुलिस, जिसमें आठ पुलिस स्टेशन शामिल हैं, ने 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0' शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत, हमने कुल 190 आरोपियों को पकड़ा।"
पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों से पहले वांछित अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ इसी तरह के ऑपरेशन जारी रहेंगे।
--आईएएनएस
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