नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में सोमवार को टोल टैक्स और ईसीसी कलेक्शन टेंडर को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा पर टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और करीब 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाते हुए पूरे टेंडर को तत्काल रद्द कर दोबारा ओपन टेंडर जारी करने की मांग की।
एमसीडी में 'आप' के सह-प्रभारी, सह-प्रभारी प्रीति डोगरा और स्टैंडिंग कमेटी सदस्य प्रवीण कुमार राजपूत ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर इस तरह संचालित किया गया ताकि भाजपा से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके। उनका दावा है कि टेंडर के लिए कुल सात कंपनियों ने बोली लगाई थी, लेकिन इनमें से 1100 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी बोली सहित चार उच्चतम बोलियों को स्वीकार नहीं किया गया, जबकि 936 करोड़ रुपए की बोली को आगे बढ़ाया गया।
प्रवीण कुमार ने कहा कि यदि एमसीडी को 1100 करोड़ रुपये तक का राजस्व मिल सकता था, तो 936 करोड़ रुपए पर टेंडर रोकना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों में भी बदलाव किया गया ताकि कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा मिल सके। उनके अनुसार, वित्तीय बोली में शामिल तीनों कंपनियां मुंबई की हैं और उनके बीच कार्टेल बनाकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग पहले ही इस मामले में एमसीडी आयुक्त को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद टेंडर प्रक्रिया को नहीं रोका गया। आम आदमी पार्टी ने मांग की कि वर्तमान टेंडर तत्काल निरस्त किया जाए, 122 लेन से जुड़े विवादित प्रावधान को हटाया जाए और पूरी प्रक्रिया दोबारा पारदर्शी तरीके से कराई जाए ताकि एमसीडी को अधिकतम राजस्व प्राप्त हो सके।
वहीं, प्रीति डोगरा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने एमसीडी में सरकार बनाने के बाद लगातार टेंडरों के जरिए अपने करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जब अधिक राजस्व प्राप्त करने का अवसर मौजूद था, तब कम राशि पर टेंडर स्वीकृत करना जनता के हितों के साथ समझौता है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार का विरोध करेगी।
स्टैंडिंग कमेटी सदस्य प्रवीण कुमार राजपूत ने भी टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमों के अनुसार टोल टैक्स का टेंडर स्टैंडिंग कमेटी के माध्यम से लाया जाना चाहिए था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च से जुलाई तक पांच महीने तक स्टैंडिंग कमेटी की बैठक नहीं होने के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले बिना समिति की मंजूरी के लिए गए।
उनका कहना था कि पूर्व में तत्कालीन मेयर शैली ओबेरॉय ने टेंडर प्रक्रिया में अधिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे ताकि एमसीडी को अधिक राजस्व मिल सके, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन सुझावों की अनदेखी की गई। आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और इसे रद्द नहीं किया गया तो वह इस मुद्दे को सदन से लेकर जनता के बीच तक मजबूती से उठाएगी।
--आईएएनएस
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