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एक नवंबर तक गैर-कानूनी हथियार जमा करें, वरना होगी सख्त कार्रवाई: सीएम डीके शिवकुमार

गैर-कानूनी हथियारों की सरकार में जमा करने की अंतिम तारीख
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बेंगलुरु, 11 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि जिनके पास बिना लाइसेंस या गैर-कानूनी हथियार हैं, वे एक नवंबर तक सरकार के पास जमा कर दें।

सीएम शिवकुमार ने चेतावनी दी कि समय सीमा के बाद ऐसे हथियार रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शिवकुमार ने बेंगलुरु के अरण्य भवन में आयोजित 'राष्ट्रीय वन शहीद दिवस' कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि जो लोग समय सीमा से पहले अपनी मर्जी से गैर-कानूनी हथियार जमा कर देंगे, उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "लोगों को एक नवंबर तक बिना लाइसेंस वाले और गैर-कानूनी हथियार सरकार के पास जमा कर देने चाहिए। वरना, सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

शिवकुमार ने कहा, "अगर गैर-कानूनी हथियार अपनी मर्जी से जमा किए जाते हैं तो कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। बिना लाइसेंस वाली बंदूकों की वजह से वन विभाग के कई कर्मचारियों की जान गई है। अगर आप अपनी सुरक्षा या अपने जानवरों की सुरक्षा के लिए बंदूक रखना चाहते हैं तो लाइसेंस लें।"

एक पुरानी घटना को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राममूर्ति नाम के वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें बताया था कि बहुत से लोगों के पास गैर-कानूनी देसी बंदूकें हैं।

उन्होंने कहा, "उस समय मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से 300 से ज्‍यादा बंदूकें सरकार के पास जमा करवाई थीं। सरकार के पास जानकारी है कि अभी भी बहुत सी देसी बंदूकें लोगों के पास हैं।"

शिवकुमार का यह निर्देश बिना लाइसेंस वाली देसी बंदूकों और उनसे जुड़े खतरों, खासकर वन क्षेत्रों में, को लेकर जताई गई चिंताओं के संदर्भ में आया है। उन्होंने उन लोगों से अपील की जो अपनी सुरक्षा या अपने पशुओं और जानवरों की सुरक्षा के लिए बंदूकें रखते हैं कि वे गैर-कानूनी तरीके से रखने के बजाय जरूरी लाइसेंस लें।

वन और पुलिस कर्मियों के भत्ते के बारे में सीएम शिवकुमार ने कहा कि सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर फैसला लेगी।

उन्होंने कहा, "आप लोग देश की वन संपदा की रक्षा करते हैं। वन्यजीवों से जुड़े टकरावों से निपटते हुए कई कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई है। विभागीय कर्मचारियों के भत्ते के संबंध में मंत्री द्वारा की गई मांग पर विचार किया जाएगा। हम वित्त विभाग के साथ इस मामले पर चर्चा करेंगे और पुलिस विभाग सहित सभी के लिए सामूहिक रूप से फैसला लेंगे।"

सीएम शिवकुमार ने वनों के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उनका गांव, घर और निर्वाचन क्षेत्र हमेशा से वन क्षेत्रों से गहराई से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बताया कि अर्कावती नदी में महासीर मछली पाई जाती थी और उन्हें वहां बैठकर मछली पकड़ना याद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय उनकी इच्छा वन मंत्री बनने की थी, और उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के कार्यकाल के दौरान यह विभाग मांगा था। हालांकि, कृष्णा ने उन्हें कृषि मंत्री बनाया, लेकिन बाद में कृषि विभाग जयचंद्र को सौंप दिया और शिवकुमार को सहकारिता विभाग दे दिया। उन्होंने बताया कि उस समय उनकी उम्र 38 साल थी।

शिवकुमार ने वन अधिकारियों से यह भी कहा कि वे जंगल के किनारे रहने वाले लोगों के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखें और विकास कार्यों में बाधा न डालें।

उन्होंने कहा, "जंगल पर कब्‍जा कोई नई बात नहीं है। आइए, कानून के मुताबिक इसका समाधान करें। लोगों पर दबाव न डालें।"

उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी कभी-कभी जरूरत से ज्‍यादा सख्ती दिखाते हैं और विकास कार्यों के लिए कुछ छूट दी जानी चाहिए।

सीएम ने 'टीक सिरी' योजना के बारे में वन अधिकारियों से इसे सफल बनाने के लिए काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को फायदा होगा और विभाग की कमाई भी बढ़ेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व मंत्री केएच रंगनाथ ने निजी जमीन पर चंदन की खेती की इजाजत दी थी।

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक ने इसे तीन-चार बार लौटाया है और आरोप लगाया कि राज्य के साथ केरल जैसा व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा।

शिवकुमार ने कर्नाटक की वन्यजीव संपदा का जिक्र करते हुए कबीनी (नदी) के दौरे और कम समय में 250 से ज्‍यादा हाथियों को देखने की बात याद की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा वन संरक्षण पर दिए गए जोर को भी याद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'शहर के फेफड़ों' (लंग्‍स ऑफ द सिटी) का विस्तार करने के लिए शहरी इलाकों में वन विभाग की जमीन पर ट्री पार्क विकसित किए जाएंगे। उन्‍होंने बेंगलुरु में स्कूली बच्चों के साथ पेड़ लगाने का कार्यक्रम सफल रहा है और नगर निकायों से ऐसी पहलों पर ज्‍यादा ध्यान देने को कहा।

शिवकुमार ने चंदन और हाथीदांत की चोरी की घटनाओं को भी याद किया, जिसमें वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के कार्यालय से हाथीदांत की चोरी और उनके घर के पास व मंत्रियों के परिसरों से चंदन के पेड़ चुराने की कोशिशें शामिल थीं।

मंत्री रामलिंगा रेड्डी के साथ अपने राजनीतिक जुड़ाव को याद करते हुए सीएम शिवकुमार ने कहा कि दोनों ने नौ-नौ चुनाव लड़े हैं और एक-एक बार हारे हैं। उन्होंने कहा, "हम ही दो ऐसे लोग हैं, जो लगातार आठ बार जीते हैं। सिद्दारमैया और येदियुरप्पा भी बीच में चुनाव हारे हैं।"

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी