Enforcement Directorate : पीएमएलए के तहत ईडी ने इंदौर के पूर्व नगर निगम अधिकारी की संपत्ति जब्त की

आय से अधिक संपत्ति मामले में ईडी की कार्रवाई, इंदौर में भूखंड और मकान जब्त
पीएमएलए के तहत ईडी ने इंदौर के पूर्व नगर निगम अधिकारी की संपत्ति जब्त की

इंदौर: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के पूर्व कर्मचारी चेतन पाटिल और उनकी पत्नी ज्योति पाटिल की 39.91 लाख रुपए की संपत्ति को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि अस्थायी रूप से जब्त की गई संपत्तियां, इंदौर में स्थित एक भूखंड और एक आवासीय भवन के रूप में हैं, जो चेतन पाटिल और उनकी पत्नी ज्योति पाटिल के नाम पर पंजीकृत हैं।

ईडी ने कहा कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) इंदौर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की गई, जिसमें ज्ञात आय स्रोतों के अनुपात से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप है।

ईडी की जांच से पता चला कि 1998 से 12 मार्च 2023 के बीच (उनकी सेवा अवधि के दौरान) पाटिल की आय के स्रोत लगभग 55.11 लाख रुपए तक थे। हालांकि, उनके पास 1.38 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति थी।

जांच में यह पाया गया कि अपराध से प्राप्त धनराशि को कथित तौर पर चेतन पाटिल के नाम पर रखे गए कई बैंक खातों और उनकी पत्नी के नाम पर स्थित एक स्वामित्व वाली कंपनी, नागरोड आर्किटेक्ट इंजीनियर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग किया गया था।

जांच में यह भी पता चला कि फर्म की कोई वास्तविक गतिविधि नहीं थी और कथित तौर पर इसका इस्तेमाल अस्पष्ट नकद जमा और धन की हेराफेरी के लिए किया जाता था।

ईडी के बयान में आगे कहा गया है, "अवैध फंड का इस्‍तेमाल अचल संपत्तियों के अधिग्रहण, आवास ऋणों के पुनर्भुगतान, एलआईसी प्रीमियम और अन्य व्यक्तिगत खर्चों के लिए किया गया, जो अपराध की आय के प्लेसमेंट, लेयरिंग और एकीकरण को दिखाता है।"

इंदौर नगर निगम के सहायक उद्यान अधिकारी चेतन पाटिल को भ्रष्टाचार और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के गंभीर आरोपों के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

बता दें कि आईएमसी के बागवानी विभाग में कार्यरत चेतन पाटिल को ईओडब्ल्यू द्वारा एफआईआर दर्ज करने और 2024 में जांच शुरू करने के बाद पद से बर्खास्त कर दिया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि उद्यान विभाग के प्रभारी के रूप में पाटिल के कार्यकाल के दौरान दो करोड़ रुपए की धोखाधड़ी वाली खरीद हुई थी।

--आईएएनएस

 

 

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