Delhi Unauthorized Colonies : दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का बड़ा नियमितीकरण: रेखा गुप्ता ने केंद्र सरकार का जताया आभार

केंद्र ने दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का ऐतिहासिक फैसला किया
दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का बड़ा नियमितीकरण: रेखा गुप्ता ने केंद्र सरकार का जताया आभार

नई दिल्ली: दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 45 लाख से ज्‍यादा प्रवासी निवासियों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को 1,511 'अनधिकृत कॉलोनियों' को नियमित करने की घोषणा की। इसके साथ ही, इन बस्तियों के लिए मंजूर लेआउट प्लान की शर्त को भी हटा दिया गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आभार जताया।

दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने राजधानी की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के ऐतिहासिक निर्णय के लिए केंद्र सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया। मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल सहित केंद्र सरकार के नेतृत्व के प्रति सर्वसम्मति से धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।"

सीएमओ ने मुख्यमंत्री के हवाले से पोस्ट में आगे लिखा, "यह निर्णय लाखों परिवारों के जीवन में नई आशा और सम्मान लेकर आया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹800 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है, जिससे इन कॉलोनियों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा और विकास को गति मिलेगी।"

बता दें कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 1,511 'अवैध कॉलोनियों' को 'जैसा है, जहां है' के आधार पर नियमित करने के निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि यह दिन दिल्ली के निवासियों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्षण है। इस घोषणा से उन 45 लाख प्रवासी निवासियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो इन बिना योजना वाली कॉलोनियों में रहते हैं। ये कॉलोनियां पिछले तीन-चार दशकों में, शहर की बढ़ती आबादी के लिए किफायती घरों की कमी के चलते, खेती की जमीन पर और बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन करके बस गई थीं।

मनोहर लाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2019 में 'प्रधानमंत्री-दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में आवास अधिकार योजना' (पीएम-उदय) शुरू की थी, ताकि इन कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक दिया जा सके। लेकिन, मंजूर लेआउट प्लान न होने की वजह से इस काम की रफ्तार धीमी थी।

--आईएएनएस

 

 

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