डीएफएस ने बीएमआईपी के अंतर्गत सुरक्षा एवं क्षतिपूर्ति संबंधी बीमा उत्पाद लॉन्च किए

डीएफएस ने बीएमआईपी के अंतर्गत सुरक्षा एवं क्षतिपूर्ति संबंधी बीमा उत्पाद लॉन्च किए

नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग ने गुरुवार को नई दिल्ली में वित्तीय सेवाएं विभाग सचिव की अध्यक्षता में एक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें भारत के पहले संप्रभुता समर्थित संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति संबंधी बीमा उत्पाद को लॉन्च किया गया। यह उत्पाद भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (बीएमआईपी) के अंतर्गत आता है और इसे न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से तैयार किया गया है।

इस कार्यक्रम में नौवहन महानिदेशक श्याम जगन्नाथन, वित्तीय सेवाएं विभाग के अतिरिक्त सचिव देबाशीष प्रुस्टी और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के सीएमडी हितेश जोशी, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की सीएमडी गिरिजा सुब्रमणियन, भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड के सीएमडी कैप्टन बिनेश कुमार त्यागी, सामान्य बीमा परिषद् की महासचिव कस्तूरी सेनगुप्ता, आईसीसीएसए और आईएनएसए के वरिष्ठ अधिकारी और पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव वेंकटेशपति एस. उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए डीएफएस सचिव ने भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए इस ऐतिहासिक उपलब्धि को प्राप्त करने के लिए संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति (पीएंडआई) बीमा उत्पाद के निर्माण की प्रक्रिया में शामिल सभी हितधारकों को बधाई दी। डीएफएस सचिव ने बीएमआईपी के अंतर्गत न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से जारी किया गया पहला पीएंडआई पॉलिसी दस्तावेज भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड को सौंपा। यह पॉलिसी चालक दल एवं मालवाहक दायित्व, प्रदूषण दायित्व, जहाज के मलबे को हटाने, चौबीसों घंटे पोर्ट कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क सहित तीसरे पक्ष के दायित्वों के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है, जिसमें पूल की संयुक्त क्षमता के माध्यम से 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक की क्षतिपूर्ति सीमा शामिल है।

12 मई, 2026 को संप्रभु गारंटी के सहयोग वाले डीएफएस की ओर से बीएमआईपी के संचालन के बाद से, पूल ने बाजार में व्यापक स्वीकृति दिखाई है और भारतीय हितधारकों को निर्बाध युद्ध जोखिम बीमा क्षमता प्रदान करने के अपने प्राथमिक उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा किया है। बीएमआईपी की शुरुआत के साथ, पश्चिम एशिया संघर्ष के चरम पर देखे गए उच्चतम स्तरों की तुलना में युद्ध जोखिम प्रीमियम दरों में लगभग 35-40 प्रतिशत की कमी आई है। 29 जुलाई, 2026 तक, पूल के अंतर्गत कार्गो युद्ध जोखिम और पतवार युद्ध जोखिम को कवर करने वाली कुल 1608 पॉलिसियां ​​जारी की गई।

जबकि बीएमआईपी तंत्र समुद्री युद्ध जोखिम बीमा कवरेज की निरंतरता सुनिश्चित करता है, घरेलू अंडरराइटिंग क्षमता के विकास को प्रोत्साहन देता है और भारत के शिपिंग और व्यापार हितधारकों के बीच भरोसा बढ़ाता है, वहीं संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति (पीएंडआई) कवरेज को शामिल करने के लिए पूल का विस्तार करने से भारत के समुद्री जोखिम प्रबंधन फ्रेमवर्क को और मजबूती मिलेगी तथा इसके समुद्री बीमा इकोसिस्टम की तन्यकशीलता में सुधार होगा।

यह पहल देश की लचीली, घरेलू बीमा क्षमताओं के निर्माण की प्रतिबद्धता की दिशा में एक और कदम है और विशेष बीमा समाधानों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर, विदेशी बाजारों पर निर्भरता को कम करके और यह सुनिश्चित करके कि भारत के समुद्री व्यापार से पैदा मूल्य घरेलू अर्थव्यवस्था के भीतर ही रहे, आत्मनिर्भर भारत के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण में सहयोग करती है।

--आईएएनएस

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