बेंगलुरु, 7 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने शुक्रवार को कर्नाटक विधान परिषद के सभापति पद से बसवराज होरट्टी के इस्तीफे का सम्मान करते हुए कहा कि उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में सदन की गरिमा और संसदीय परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हरिप्रसाद ने जारी बयान में कहा कि बसवराज होरट्टी ने अपने लंबे राजनीतिक और विधायी जीवन के दौरान कर्नाटक की संसदीय व्यवस्था को उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि विधान परिषद के सभापति के रूप में होरट्टी ने सदन की कार्यवाही निष्पक्षता के साथ संचालित की और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष, दोनों को अपनी बात रखने का समान अवसर दिया।
उन्होंने कहा, "संयम, परिपक्वता और निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन करते हुए सभी सदस्यों को समान अवसर देने वाली उनकी कार्यशैली हमेशा याद रखी जाएगी।"
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने संवैधानिक पदों की गरिमा और संसदीय परंपराओं को बनाए रखने के लिए होरट्टी की प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं उनके फैसले का सम्मान करता हूं और कर्नाटक की संसदीय व्यवस्था के प्रति उनकी लंबी सेवा को आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं।"
इससे पहले शुक्रवार को बसवराज होरट्टी ने कर्नाटक विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब राज्य की राजनीति में विधान परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर हलचल बनी हुई है।
इस बीच, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने होरट्टी के इस्तीफे का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम संसदीय परंपराओं के अनुरूप है। पार्टी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।
केपीसीसी के मीडिया एवं संचार विभाग के अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी रमेश बाबू ने कहा कि विधान परिषद में जिस दल के पास बहुमत नहीं रह जाता, उसके सभापति या उपसभापति का स्वेच्छा से पद छोड़ना लंबे समय से चली आ रही संसदीय परंपरा रही है।
उन्होंने बताया कि 75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस के 39 सदस्य हैं, जबकि भाजपा के 24, जद (एस) के छह और एक निर्दलीय सदस्य है। 13 अगस्त से शुरू होने वाले परिषद के सत्र से पहले होरट्टी का इस्तीफा संसदीय परंपराओं के अनुरूप है।
रमेश बाबू ने पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के उस आरोप को खारिज किया, जिसमें उन्होंने होरट्टी के इस्तीफे के पीछे राजनीतिक दबाव होने की बात कही थी।
उन्होंने याद दिलाया कि फरवरी 2021 में जब भाजपा को विधान परिषद में बहुमत मिला था, तब तत्कालीन सभापति प्रताप चंद्र शेट्टी ने इस्तीफा दिया था। उस समय भाजपा ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए सदन की कार्यवाही भी बाधित की थी।
रमेश बाबू ने आरोप लगाया कि भाजपा अब संसदीय परंपराओं और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेताओं ने हाल तक होरट्टी को इस्तीफा नहीं देने के लिए मनाने का प्रयास किया, ताकि सभापति के पद के जरिए राजनीतिक लाभ बरकरार रखा जा सके।
उन्होंने विवाद को राज्य में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के दौरान एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं और भाजपा इस मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए होरट्टी के इस्तीफे को विवाद का विषय बना रही है।
केपीसीसी ने भाजपा पर विधान परिषद के सभापति जैसे संवैधानिक पद का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सदन के भीतर जनहित के मुद्दे उठाने में विफल रहने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।
--आईएएनएस
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