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भारत-रूस साझेदारी से डिफेंस और स्पेस सेक्टर को मिल सकता है बड़ा फायदा: गौरव वल्लभ

ब्रिक्स भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच: गौरव वल्लभ
भारत-रूस

नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर देश और दुनिया की नजरें दिल्ली पर टिकी हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत, चीन और ईरान के साथ संभावित चर्चा और ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार और पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने की पहल पर चर्चा तेज है।

भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने इन मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए विपक्ष पर भारत की वैश्विक उपलब्धियों को लेकर नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ब्रिक्स भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, रोजगार और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का अवसर है।

सलमान खुर्शीद की ब्रिक्स को लेकर टिप्पणी पर गौरव वल्लभ ने कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को ब्रिक्स से भारत को हुए लाभों को समझना चाहिए। ब्रिक्स बैंक के जरिए भारत में 32 परियोजनाओं के लिए फंडिंग हुई है और इन परियोजनाओं के लिए कुल स्वीकृत राशि करीब 91 हजार करोड़ रुपए है। ब्रिक्स देशों को भारत का निर्यात बढ़कर 95.7 अरब डॉलर हो गया है। यूएई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत का यूएई को निर्यात 125 प्रतिशत बढ़कर 37.4 अरब डॉलर तक पहुंचा है।

गौरव वल्लभ ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष रियो में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में पहलगाम आतंकी घटना की सामूहिक रूप से निंदा की गई थी। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर ऐसे मंचों को राष्ट्रहित के नजरिए से देखे। हालांकि, इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर तीखी राजनीतिक टिप्पणी भी की और आरोप लगाया कि जब भारत की वैश्विक स्तर पर प्रशंसा होती है तो विपक्ष के कुछ नेता इसे स्वीकार नहीं कर पाते।

प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की द्विपक्षीय बैठक को लेकर गौरव वल्लभ ने कहा कि भारत और रूस के बीच रक्षा, एयरोस्पेस, केमिकल एवं फर्टिलाइजर और स्पेस सेक्टर में सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। रूस के पास तकनीक और विशेषज्ञता है, जबकि भारत के पास डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर, बौद्धिक पूंजी और युवा आबादी है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन करीब पौने दो लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जबकि 2014 में यह करीब 40 हजार करोड़ रुपए था।

उन्होंने कहा कि यदि रूस की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विनिर्माण क्षमता साथ आती है तो रक्षा उत्पादन में और तेजी लाई जा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मोदी-पुतिन बातचीत में ऐसे क्षेत्रों पर सकारात्मक चर्चा हुई होगी, जिससे दोनों देशों के व्यापार और अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सके। उन्होंने रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं बताईं। इस दौरान उन्होंने यह स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय बैठक में वास्तव में क्या निर्णय हुए, इसका अनुमान लगाना उचित नहीं है और इसके परिणाम सामने आने का इंतजार किया जाना चाहिए।

चीन और ईरान के साथ संभावित बातचीत पर गौरव वल्लभ ने कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत 'राष्ट्रहित सर्वोपरि' है। भारत सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है और विदेश नीति से जुड़े निर्णय राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। चीन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच संवाद जरूरी है। ब्रिक्स जैसे मंच पर दोनों देशों के बीच बातचीत से आर्थिक और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने विदेश नीति में राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का दावा किया है और आगे भी इसी आधार पर फैसले लिए जाएंगे।

ब्रिक्स देशों के बीच पेमेंट सर्विस और स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने की पहल पर गौरव वल्लभ ने कहा कि भारत पहले से ही कुछ देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में सेटलमेंट कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि रूस के साथ होने वाले व्यापार का बड़ा हिस्सा रुपया-रूबल व्यवस्था के जरिए हो रहा है। यूएई के साथ रुपए-दिरहम में व्यापार की व्यवस्था का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार होने से विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सकता है और चालू खाते के घाटे से जुड़े आर्थिक दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

गौरव वल्लभ ने कहा कि ब्रिक्स के मंच पर केवल बड़े देशों और बड़ी कंपनियों की बात नहीं होनी चाहिए। भारत के एमएसएमई और एसएमई सेक्टर को दूसरे देशों के बाजारों तक आसान पहुंच दिलाना भी महत्वपूर्ण एजेंडा होना चाहिए। उन्होंने उत्पादों के लिए ब्रिक्स देशों के बीच साझा मानक विकसित करने की जरूरत बताई, ताकि व्यापार के दौरान तकनीकी और नियामकीय बाधाएं कम हों। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स सम्मेलन में स्थानीय मुद्रा में व्यापार, एमएसएमई के लिए नए बाजार, कॉमन प्रोडक्ट स्टैंडर्ड और पेमेंट सेटलमेंट जैसे मुद्दों पर ठोस चर्चा होगी।

--आईएएनएस

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