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भारत-रूस संबंध अब प्रोटोकॉल से उत्पादन और इरादे से उद्योग की ओर बढ़ने को तैयार: पीयूष गोयल

भारत और रूस के बीच सहयोग को ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़ाने की आवश्यकता
भारत-रूस

नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और रूस के बीच दशकों पुराने भरोसे और मजबूत राजनीतिक रिश्तों को अब ठोस आर्थिक परिणामों, औद्योगिक साझेदारी और निवेश सहयोग में बदलने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अब "प्रोटोकॉल से उत्पादन और इरादे से उद्योग" की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

पीयूष गोयल ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित इनोप्रोम 2026 के तहत इंडिया-रूस बिजनेस डायलॉग के समापन सत्र "रूस-भारत व्यापार और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत बनाना: अधिक आत्मनिर्भरता की ओर" को संबोधित करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर विनिर्माण क्षमता, तेजी से बढ़ते औद्योगिक आधार और नवाचार के लिए तैयार युवा आबादी के साथ रूस का मजबूत साझेदार बन सकता है। वहीं रूस के पास एयरोस्पेस, धातुकर्म, परमाणु प्रौद्योगिकी और खनन जैसे क्षेत्रों में दशकों का इंजीनियरिंग अनुभव है। इन दोनों ताकतों के मिलने से केवल व्यापार नहीं, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं की मजबूती भी बढ़ेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच सहयोग को ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़ाकर दवा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, वस्त्र और खाद्य उत्पादों जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन के लिए भारतीय निर्यात में विविधता लाना साझा लक्ष्य हासिल करने का अहम माध्यम होगा।

पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच नए द्विपक्षीय निवेश समझौते (बीआईटी) को जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के निवेशकों को कानूनी भरोसा मिलेगा और निवेश परियोजनाओं को गति मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ (ईएईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर औपचारिक बातचीत शुरू हो चुकी है और इसे जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता है।

रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में वही देश आगे बढ़ेंगे जो अपने संसाधनों और क्षमताओं को जोड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के पास यह क्षमता मौजूद है और दोनों देश औद्योगिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।

उन्होंने पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर संयुक्त विनिर्माण, स्थानीयकरण, सह-विकास और प्रौद्योगिकी आधारित साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने नागरिक उड्डयन, दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण खनिज, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, मानव रहित प्रणालियों और डिजिटल प्रौद्योगिकी को भविष्य के प्रमुख सहयोग क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया।

सीआईआई के अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा कि भारत-रूस आर्थिक सहयोग अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विनिर्माण, तकनीक, नवाचार और संयुक्त मूल्य सृजन पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और मजबूत विनिर्माण क्षमता रूसी कंपनियों के लिए भारत को उत्पादन और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने का अवसर प्रदान करती है।

इस सत्र का संचालन इनोप्रोम के बिजनेस प्रोग्राम निदेशक एंटोन अत्राश्किन ने किया। पैनल में सबर के प्रथम उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर वेद्याखिन, रोसाटॉम के प्रथम उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी किरिल कोमारोव, सीआईआई अंतरराष्ट्रीय परिषद के सह-अध्यक्ष डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी और ट्रांसमाश होल्डिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी किरिल लिपा भी शामिल रहे।

--आईएएनएस

डीएससी