अलवर, 28 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बाघों के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, वन्यजीवों की सुरक्षा और विकसित भारत 2047 के विजन पर बात की। उन्होंने पर्यावरण की स्थिरता, बायोडायवर्सिटी के संरक्षण और इकोलॉजिकल सुरक्षा के उपायों को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयासों पर जोर दिया, साथ ही विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को पाने के लिए रोडमैप भी बताया।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने वन्यजीव संरक्षण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। आज भारत विश्व के लगभग 75 प्रतिशत जंगली बाघों का सुरक्षित आवास है, जो हमारी संरक्षण नीति, जनभागीदारी और प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था का प्रमाण है।
आईएएनएस से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अकेला ऐसा देश है जिसने सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट के दौरान तय किया गया टारगेट हासिल किया है, जहां दुनियाभर के देशों से अपनी टाइगर आबादी को दोगुना करने की अपील की गई थी। भारत ने उस टारगेट को पूरा कर लिया है। दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत टाइगर भारत में पाए जाते हैं। हमने टाइगर रिजर्व की संख्या के साथ-साथ टाइगर कंजर्वेशन के तहत आने वाले एरिया को भी बढ़ाया है। आज, भारत ने टाइगर कंजर्वेशन में खुद को ग्लोबल रोल मॉडल के तौर पर स्थापित किया है।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि हम सिर्फ टाइगर कंजर्वेशन के लिए काम नहीं कर रहे हैं, हम दुनियाभर में पाई जाने वाली बिग कैट की सभी पांच प्रजातियों के कंजर्वेशन के लिए काम कर रहे हैं। इसीलिए भारत ने अपने क्लाइमेट एक्शन इनिशिएटिव के हिस्से के तौर पर इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस को भी शामिल किया है। इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस की एक मीटिंग होनी थी, लेकिन कुछ वजहों से वह नहीं हो सकी। दुनियाभर के 27 से ज्यादा देश और जाने-माने ऑर्गनाइजेशन इस अलायंस के मेंबर बन चुके हैं और हम उनके साथ लगातार काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमें अपने 58 टाइगर रिजर्व के लिए साइंटिफिक अप्रोच और कैपेसिटी बिल्डिंग के आधार पर एक बड़ा प्लान तैयार करने की जरूरत है। इसी मकसद से हमने दो दिन की टेक्निकल वर्कशॉप ऑर्गनाइज की है। वर्कशॉप का मकसद हमारी सक्सेस स्टोरीज से मिली जानकारी शेयर करना, हमारे सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करना और यह तय करना है कि कहां नए साइंटिफिक दखल की जरूरत है। इस वर्कशॉप के नतीजों के आधार पर हम अपने टाइगर रिजर्व की कमियों को दूर करेंगे और इंसानों और जानवरों के बीच टकराव को कम करने के लिए साइंस-बेस्ड अप्रोच अपनाएंगे, साथ ही स्पीशीज के कंजर्वेशन को मजबूत करेंगे।
लोगों की भागीदारी का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर, लोगों में जागरूकता और बचाव और संरक्षण में हमारी भूमिका बहुत जरूरी है। इंसान-जानवरों का टकराव एक चुनौती बना हुआ है, और इसे सुलझाने के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही, हमारा तरीका उन पारंपरिक समुदायों के साथ मिलकर काम करना है जो इन इलाकों में लंबे समय से रह रहे हैं। हम उनकी रोजी-रोटी पर ध्यान देना चाहते हैं, उन्हें टूरिज्म से जुड़ी गतिविधियों में शामिल करना चाहते हैं और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना चाहते हैं। हमारा मकसद बचाव की कोशिशों के साथ-साथ इन सभी पहलुओं पर स्थानीय समुदायों के साथ काम करना है।
पीएम मोदी के मन की बात के 135वें एपिसोड को लेकर भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने नागालैंड का एक बहुत अच्छा उदाहरण दिया, जहां उन्होंने बेबी फुटबॉल के बारे में बात की। पर्यावरण संरक्षण पर उन्होंने मध्य प्रदेश के ब्यावरा में महिलाओं द्वारा प्लास्टिक को दोबारा इस्तेमाल करने के काम पर भी जोर दिया। उन्होंने मेघालय में लिविंग रूट ब्रिज का भी जिक्र किया।
प्रदूषण को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत हमने 130 शहरों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। नेशनल कैपिटल रीजन में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण, धूल के प्रदूषण, इंडस्ट्रियल प्रदूषण और ग्रीन कवर के विकास को सुलझाने के लिए एक साथ काम किया जा रहा है। मेरा मानना है कि जो काम म्युनिसिपल लेवल पर करने की जरूरत है, उसे जमीन पर असरदार तरीके से लागू किया जाना चाहिए और इससे इस पहल को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इकोलॉजी और इकॉनमी को साथ-साथ चलना चाहिए। हमें नेचर-बेस्ड सॉल्यूशन की ओर बढ़ना चाहिए। हमें रीयूज, रीसायकल और रिप्रोड्यूस के प्रिंसिपल्स को अपनाना चाहिए, सर्कुलर इकॉनमी को अपनाना चाहिए और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल को बढ़ावा देना चाहिए। मिशन लाइफ के प्रिंसिपल्स, जैसे एनर्जी बचाना, खाना बचाना, पानी बचाना, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, ई-वेस्ट मैनेजमेंट, सिंगल-यूज प्लास्टिक पर बैन लगाना और हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा देना, इन सभी को बढ़ावा देना चाहिए।
--आईएएनएस
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