बिहार: नालंदा विश्वविद्यालय में ‘नालंदा शोध विहार’ का उद्घाटन, अरविंद पनगढ़िया ने विद्यार्थियों से कहा- पसंद के विषय में विशेषज्ञता हासिल करें

बिहार: नालंदा विश्वविद्यालय में ‘नालंदा शोध विहार’ का उद्घाटन, अरविंद पनगढ़िया ने विद्यार्थियों से कहा- पसंद के विषय में विशेषज्ञता हासिल करें

राजगीर, 10 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में ‘नालंदा शोध विहार’ का उद्घाटन किया। साझा शोध परिसर के रूप में विकसित यह शोध विहार विश्वविद्यालय के सभी छह शोध केंद्रों को एक स्थान पर जोड़ने का काम करेगा। इससे अनुसंधान, नीतिगत अध्ययन और अंतर-विषयक सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उद्घाटन के बाद विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागार में विशेष व्याख्यान और संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और संस्थागत गतिविधियों, भविष्य की योजनाओं तथा प्रमुख पहलों की जानकारी दी। उन्होंने संस्थागत डेटाबेस को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर विकसित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने अपने संबोधन में अध्यापन और अनुसंधान के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण और शोध एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं और दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए। विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी पसंद के विषय का चयन करें, उसमें पूरी लगन से काम करें और विशेषज्ञता हासिल करते हुए उत्कृष्टता की ओर बढ़ें।

पनगढ़िया ने कम समय में नालंदा विश्वविद्यालय की ओर से हासिल की गई प्रगति की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय में शिक्षकों और विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के लिए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने विश्वविद्यालय की ‘सहभागिता’ पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज और आसपास के समुदायों से जुड़कर काम करना विश्वविद्यालय की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को चांसलर से सीधे सवाल पूछने और अपने विचार साझा करने का अवसर मिला। इस संवाद में विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

विश्वविद्यालय के अनुसार, यह संवाद सवाल पूछने, विचारों के आदान-प्रदान और सीखने की उस परंपरा को दर्शाता है, जो प्राचीन नालंदा की बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) रुद्रेद्र टंडन ने नालंदा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अंतरराष्ट्रीय और संस्थागत गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मंत्रालय की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। इससे एक दिन पहले, 9 अगस्त को बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में नालंदा विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक विकास को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई।

बैठक में विश्वविद्यालय की कनेक्टिविटी बेहतर करने, नालंदा-राजगीर नॉलेज एंड इनोवेशन कैंपस के विकास, बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने तथा नालंदा की बौद्धिक और सभ्यतागत विरासत को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। बैठक में नालंदा विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर ज्ञान, नवाचार और उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में मजबूत करने से जुड़े प्रयासों की भी समीक्षा की गई। इसमें विश्वविद्यालय के चांसलर, बिहार सरकार के मुख्य सचिव, विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट), कुलपति तथा भारत सरकार, बिहार सरकार और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक के बाद नालंदा-लोक भवन व्याख्यान श्रृंखला के तहत प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने ‘राज्य के नेतृत्व में बदलाव : भारत के राज्यों में शहरीकरण, रोजगार और सुधार का एजेंडा’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में राज्यों की भूमिका, शहरीकरण, रोजगार के अवसर बढ़ाने, बेहतर प्रशासन, वित्तीय अनुशासन और कारोबार को आसान बनाने के लिए जरूरी सुधारों पर अपने विचार रखे।

--आईएएनएस

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