पटना, 15 जून (आईएएनएस)। बिहार सरकार राज्य के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में एशिया प्रसिद्ध सोनपुर मेला स्थल और सारण जिले के आमी स्थित अंबिका भवानी मंदिर के व्यापक विकास की योजना बनाई गई है। पर्यटन विभाग ने दोनों परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार को 37 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का प्रस्ताव भेजा है।
बताया गया कि स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत सोनपुर मेला क्षेत्र के विकास के लिए 24.29 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को प्रशासनिक स्वीकृति के लिए भेजी गई है। गंगा और गंडक नदियों के संगम पर आयोजित होने वाला सोनपुर मेला देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला यह मेला धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
परियोजना के तहत सोनपुर मेला परिसर में भव्य प्रवेश द्वार, चौड़ी एवं बेहतर सड़कें, डिजिटल सूचना प्रणाली, हरित ऊर्जा आधारित सुविधाएं, आधुनिक पार्किंग, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय और पर्यटकों के लिए अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इससे मेला क्षेत्र को सालभर पर्यटन गतिविधियों के लिए विकसित करने में मदद मिलेगी।
वहीं, शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध आमी स्थित अंबिका भवानी मंदिर के विकास के लिए 13.19 करोड़ रुपये की योजना केंद्र सरकार को भेजी गई है। इस परियोजना के अंतर्गत मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, नदी तट का विकास, पार्किंग, अतिथि गृह, वॉकवे, प्रकाश व्यवस्था और अन्य पर्यटक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
पर्यटन विभाग के अनुसार वर्तमान में राज्यभर में 33 बड़ी पर्यटन परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें पुनौराधाम, महाबोधि केंद्र, इको पार्क, लेक फ्रंट सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। गया में 165.44 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध मेडिटेशन सेंटर का निर्माण भी प्रगति पर है।
इसके अलावा राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए पीपीपी मॉडल पर पांच फाइव स्टार होटलों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें राजगीर में दो, वैशाली में एक तथा पटना में दो होटल विकसित किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि पर्यटन स्थलों के विकास से न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।