पटना, 10 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने सोमवार को कहा कि राज्य के भूमिहीन विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो माह में 24 केंद्रीय विद्यालयों के लिए अधिकतम पांच एकड़ तक भूमि उपलब्ध कराई गई है। साथ ही विद्यालयों और खेल मैदानों से अतिक्रमण हटाने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है।
अधिवेशन भवन में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के दूसरे दिन शिक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि शिक्षा विभाग से जुड़े भूमि संबंधी मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए प्रत्येक जिले में अलग से नोडल अधिकारी की तैनाती की जाएगी। इसके लिए डीसीएलआर या एडीएम स्तर के पदाधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग को ऐसे विद्यालयों की सूची प्राप्त हुई है, जहां अतिक्रमण की समस्या है। इन विद्यालयों को अतिक्रमणमुक्त कराने के साथ-साथ विद्यालयों तक पहुंच पथ के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है।
डॉ. जायसवाल ने शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए समर्पित होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी नई पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की पहल से शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
राजस्व मंत्री ने विभागीय सचिव, जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडी) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सहित सभी अधिकारियों को सुझाव दिया कि वे महीने में कम से कम एक दिन किसी विद्यालय में जाकर बच्चों से संवाद करें और कक्षा लें। इससे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को काम के दबाव को खुद पर हावी नहीं होने देने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को मानसिक तनाव कम रखते हुए सकारात्मक ऊर्जा और मुस्कान के साथ लोगों से मिलना चाहिए। हर काम परिणाम केंद्रित होना चाहिए। डॉ. जायसवाल ने कहा कि समय-समय पर ऐसे चिंतन शिविरों के जरिए अधिकारियों और शिक्षकों को अपने कार्यों की समीक्षा करनी चाहिए। इससे शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार का आकलन किया जा सकेगा। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी मौजूद रहे।