भोपाल, 13 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भोपाल में आयोजित ‘आत्मनिर्भर महिला सम्मान’ कार्यक्रम में आत्मनिर्भर नारी शक्ति से संवाद किया और उनके द्वारा तैयार किए जा रहे विभिन्न उत्पादों का अवलोकन किया।
इस दौरान उन्होंने महिलाओं के परिश्रम, प्रतिभा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि देश की नारी शक्ति आज कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता के बल पर अपनी नई पहचान बना रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से लखपति दीदियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वरोजगार के साथ-साथ शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने उन महिलाओं की भी सराहना की जो उच्च शिक्षा, पीएचडी और डबल आईटीआई जैसे कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से अपने भविष्य को नई दिशा दे रही हैं।
उन्होंने मंदिरों से जुड़े अपशिष्ट पदार्थों के पुनः उपयोग से नए उत्पाद तैयार करने की पहल को स्वच्छता, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता का प्रेरक उदाहरण बताया। साथ ही केंद्र सरकार की गोवर्धन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी पहलें कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलकर पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की कि महिलाओं को शिक्षा और कौशल के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के साथ मिलकर नए प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी इस पहल से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा, ताकि महिलाओं को बेहतर अवसर और नई संभावनाएं मिल सकें।
उन्होंने कहा कि भोपाल को स्वच्छ, सुंदर और आत्मनिर्भर शहर बनाने में नारी शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देकर ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर जीवनशैली के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भोपाल का हर घर नारी शक्ति की आत्मनिर्भरता और सफलता की कहानी का साक्षी बने, यही प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि मातृ शक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही ‘विकसित भारत’ का सपना साकार होगा और यही शक्ति देश की प्रगति एवं समृद्धि का आधार बनेगी।
--आईएएनएस
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