पटना, 17 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बाद महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना से कई सांसदों के बागी होने की चर्चाएं हैं। इसी बीच, दूसरे दलों को तोड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर लग रहे आरोपों को लेकर बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा पार्टियां नहीं तोड़ती है।
पार्टी का बचाव करते हुए संजय सरावगी ने आईएएनएस से कहा, "भाजपा पार्टियां नहीं तोड़ती। पश्चिम बंगाल में जो हुआ, उसे देखिए। ममता बनर्जी की जन-विरोधी नीतियों के 15 साल बाद कई सांसदों को लगता है कि वे टीएमसी के चुनाव चिह्न पर दोबारा नहीं जीत सकते। ममता बनर्जी और टीएमसी के खिलाफ लोगों में काफी नाराजगी है, इसीलिए नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। अगर वे एनडीए के सहयोगियों के साथ जुड़ते हैं, तो इससे एनडीए और उसकी सरकार मजबूत होगी। हम इसका स्वागत करते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "महाराष्ट्र में, शिवसेना बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा से निकली थी। आज, शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है, जबकि बालासाहेब ठाकरे कांग्रेस और उसकी नीतियों के कड़े विरोधी थे। नतीजतन, वहां भी असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला दिख रहा है। अगर नेता एनडीए में शामिल हो रहे हैं, तो इससे एनडीए सरकार ही मजबूत होगी और हम ऐसी घटनाओं का स्वागत करते हैं।"
गौरतलब है कि टीएमसी में करीब 20 सांसदों ने ममता बनर्जी से बगावत की। वहीं, महाराष्ट्र में शिवसेना-यूबीटी से 6 सांसदों के बागी होने की अटकलें हैं। कहा जा रहा है कि बागी सांसदों ने दिल्ली में लोकसभा स्पीकर से भी मुलाकात की है।
संजय सरावगी ने इस दौरान पटना में फैजल खान (खान सर) और रौशन आनंद के बीच विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "जो भी कानून तोड़ेगा, सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ऐसे मामलों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और सरकार उचित कार्रवाई करेगी।"
नीट परीक्षा को लेकर संजय सरावगी ने कहा, "नीट पेपर लीक को लेकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की गई है। परीक्षाओं को लेकर जितने भी सुरक्षा उपाय हो सकते हैं, सभी तरीके से अपनाए जा रहे हैं। पेपर लीक की संभावनाओं को देखते हुए एप बंद किए गए हैं। सही ढंग से परीक्षा कराने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"
जरूरतमंदों के लिए सहायता शिविरों के बारे में बिहार भाजपा अध्यक्ष ने कहा, "प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को राज्य के सभी प्रखंडों के दो-तीन पंचायतों में यह शिविर आयोजित होंगे। जिन लोगों को भी समस्याएं हैं, वे शिविरों में लिखित आवेदन दें। 30 दिन में अधिकारियों को उस आवेदन का निष्पादन करना अनिवार्य है। अगर अधिकारी इसका निष्पादन नहीं करेंगे तो 31वें दिन वह स्वत: निलंबित हो जाएंगे। इसलिए जागरुक जनता शिविरों में पहुंच रही है।"
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के 12 साल के उपलक्ष्य में भी राज्य के सभी प्रखंडों में दो दिवसीय शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें केंद्र और राज्य की योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसलिए जितने भी शिविर लग रहे हैं, वे बिहार की आम जनता के हित में हैं।
--आईएएनएस
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