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भाजपा ने कर्नाटक सरकार के 100 दिन पूरे होने पर मनाए गए जश्न का उड़ाया मजाक

कर्नाटक सरकार के 100 दिन पूरे होने पर भाजपा ने मनाए गए जश्न का उड़ाया मजाक
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बेंगलुरु, 10 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने गुरुवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने पर मनाए गए जश्न का मजाक उड़ाया।

अशोक ने आरोप लगाया, "जब बेंगलुरु बदहाल हो रहा है तो डीके शिवकुमार सरकार अपनी शान-ओ-शौकत दिखाने के लिए गगनचुंबी स्मारक बना रही है।"

उनकी यह टिप्पणी तब आई जब शिवकुमार ने गुरुवार को विधान सौधा में 'दृढ़ कर्नाटक संकल्प: शतका दा पाठा, प्रगति रथ' कार्यक्रम के साथ मुख्यमंत्री के तौर पर 100 दिन पूरे किए।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस कार्यक्रम के दौरान कई पहल शुरू कीं, जिनमें सेवा वन, रैथा चैतन्य, स्कूलों के लिए एक सीएसआर पोर्टल, स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए मुफ्त बस पास और मोबिलिटी एप्लिकेशन शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने भूमिहीन परिवारों को पांच लाख आवास स्थल बांटने की घोषणा भी की।

बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडीए) मुख्यालय के प्रस्तावित पुनर्विकास पर निशाना साधते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि जहां बेंगलुरु बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहा है, वहीं बीडीए मौजूदा इमारतों को गिराकर 30 मंजिला मुख्यालय बनाने की योजना बना रहा है, जबकि वे इमारतें अच्छी हालत में बताई जाती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीडीए की कई दशक पुरानी कॉलोनियों में अभी भी अच्छी सड़कें, पर्याप्त पानी की आपूर्ति और बुनियादी नागरिक सुविधाएं नहीं हैं, जबकि अथॉरिटी अपने मुख्यालय के पुनर्विकास पर लगभग 110 करोड़ रुपए खर्च करने पर विचार कर रही है।

अशोक ने 2004 में बनी इमारतों को गिराने की जरूरत पर सवाल उठाया और दावा किया कि मौजूदा इमारतें अच्छी हालत में हैं।

उन्होंने कहा, "यह विकास नहीं है। यह प्राथमिकताओं का खुला उल्लंघन है।"

भाजपा नेता ने प्रस्तावित प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी जताईं और आरोप लगाया कि पुनर्विकास से बेंगलुरु के हरे-भरे इलाकों में से एक, कुमारा पार्क वेस्ट में पेड़ों के घने आवरण पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने टी. चौडैया रोड पर ऊंची इमारत वाले मुख्यालय के प्रस्तावित निर्माण का भी विरोध किया और आरोप लगाया कि उस इलाके में पहले से ही भारी ट्रैफिक जाम की समस्या है और एक विशाल नया टावर इस समस्या को और बढ़ा सकता है।

अशोक ने कहा कि यह प्रस्ताव गलत प्राथमिकताओं को दर्शाता है, जबकि नागरिक सालों से बीडीए साइट्स और बुनियादी ढांचे का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "बेंगलुरु को 30 मंजिला बीडीए स्मारक की जरूरत नहीं है। बेंगलुरु को दशकों से लंबित बुनियादी ढांचे को ठीक करने की जरूरत है।"

उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे फिजूलखर्ची वाले पुनर्विकास प्रोजेक्ट के बजाय सड़कों, पानी की आपूर्ति और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

अशोक ने कहा, "टावर से पहले सड़कें बनाएं। स्मारकों से पहले सुविधाएं दें। नौकरशाही के अहंकार से पहले नागरिकों की सेवा करें।" उन्होंने बीडीए हेडक्वार्टर के नए सिरे से विकास के दौरान वहां की जगह का कमर्शियल इस्तेमाल करने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई और इसे सरकारी संपत्ति का गैर-जिम्मेदाराना कमर्शियलाइजेशन बताया।

अशोका ने कांग्रेस सरकार पर सरकारी जमीन और संस्थानों का इस्तेमाल बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए करने का आरोप लगाया और कहा कि बीडीए को बेंगलुरु के विकास की अपनी मुख्य जिम्मेदारी पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, "बीडीए का काम बेंगलुरु का विकास करना है, न कि बेंगलुरु के खर्च पर खुद का दोबारा विकास करना।"

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी