बेंगलुरु, 23 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) के प्रदेश अध्यक्ष और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने बेंगलुरु की बदहाल सड़कों और गड्ढों के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा को पत्र लिखकर पिछले तीन वर्षों में सड़क मरम्मत और गड्ढे भरने पर हुए खर्च का श्वेत पत्र जारी करने तथा एक सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड शुरू करने की मांग की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सूर्या ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में बेंगलुरु की सड़कों पर लगभग 5,500 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन स्थिति ऐसी है कि "98 प्रतिशत गड्ढे और केवल 2 प्रतिशत सड़कें" दिखाई देती हैं।
सूर्या ने बताया कि उन्होंने मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा से मुलाकात कर दो "अपरिहार्य मांगें" रखी हैं। पहली, अगले 30 दिनों के भीतर ऐसा श्वेत पत्र जारी किया जाए, जिसमें पिछले तीन वर्षों के दौरान सड़क मरम्मत और रखरखाव पर हुए खर्च का पूरा विवरण हो। दूसरी, अगले 60 दिनों में एक लाइव इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड शुरू किया जाए, जिसमें परियोजनाओं की समयसीमा, बजट और संबंधित ठेकेदारों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अगले 2,000 करोड़ रुपये के नए आवंटन से पहले लागू की जानी चाहिए।
पत्र में सूर्या ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला बेंगलुरु दुर्भाग्य से "पॉथोल सिटी" (गड्ढों वाला शहर) के रूप में भी जाना जाने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क मरम्मत और रखरखाव के लिए हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
सांसद ने पत्र में कहा कि मानसून के मद्देनजर यह समस्या अब केवल शिकायत का विषय नहीं रह गई है, बल्कि पैदल यात्रियों, दोपहिया चालकों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के माध्यम से शहर को गड्ढामुक्त बनाने की समयसीमा तय की थी। हालांकि जून 2026 तक वह समयसीमा समाप्त हो चुकी है और अब सड़क मरम्मत के लिए 2,000 करोड़ रुपये के नए आवंटन के साथ आठ महीने की नई समयसीमा घोषित की गई है।
सूर्या ने कहा कि समयसीमाएं बदलती जा रही हैं, धनराशि आवंटित होती जा रही है, लेकिन गड्ढों की समस्या जस की तस बनी हुई है। उनके अनुसार, समस्या धन की कमी नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी है।
उन्होंने सरकार से सड़क परियोजनाओं में खर्च हुए धन, कार्यों की प्रगति और ठेकेदारों की जवाबदेही को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि नागरिक लगातार घोषणाओं से निराश हैं और अब ठोस परिणाम चाहते हैं।