बीआरएस ने चुनाव आयोग से डुप्लिकेट मतदाता हटाने की मांग की, 'एक नागरिक-एक वोट' पर दिया जोर

बीआरएस ने चुनाव आयोग से डुप्लिकेट मतदाता हटाने की मांग की, 'एक नागरिक-एक वोट' पर दिया जोर

नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर मतदाता सूची में डुप्लिकेट और एक से अधिक बार दर्ज मतदाताओं की पहचान एवं उन्हें हटाने की मांग को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने देशभर में विशेष अभियान चलाने का आग्रह करते हुए कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण 'एक नागरिक–एक वोट' के सिद्धांत के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही किसी भी वास्तविक मतदाता का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

बीआरएस ने चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तावित स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर)-2026 का समर्थन करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, वैज्ञानिक और कानूनसम्मत तरीके से संचालित की जानी चाहिए। पार्टी ने आश्वासन दिया कि वह इस अभियान में चुनाव आयोग को पूरा सहयोग देगी।

पार्टी ने आयोग को बताया कि उसने तेलंगाना के सभी जिलों में लगभग 35,000 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) तैनात किए हैं, जो संदिग्ध डुप्लिकेट और बहु-पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान करने में सहयोग करेंगे। बीआरएस का दावा है कि उसकी प्रारंभिक जांच में राज्य के सभी 119 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

ज्ञापन के अनुसार, पार्टी ने संदिग्ध डुप्लिकेट मतदाता पंजीकरण को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। इनमें एक ही विधानसभा क्षेत्र के भीतर, एक ही संसदीय क्षेत्र के भीतर, तेलंगाना के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के बीच तथा तेलंगाना और पड़ोसी राज्यों के बीच पाए जाने वाले संभावित डुप्लिकेट पंजीकरण शामिल हैं।

बीआरएस ने दावा किया कि उसकी प्रारंभिक जांच में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में औसतन 16,243 संदिग्ध डुप्लिकेट मतदाता प्रविष्टियां मिली हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह संख्या 53,695 तक पहुंची है। हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया कि ये केवल प्रारंभिक स्तर पर चिह्नित संदिग्ध मामले हैं, जिनकी अंतिम पुष्टि चुनाव आयोग की कानूनी जांच के बाद ही होनी चाहिए।

पार्टी ने कहा कि तेलंगाना की सीमाएं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से लगती हैं। ऐसे में एसआईआर-2026 के दौरान अंतरराज्यीय स्तर पर भी डुप्लिकेट मतदाता पंजीकरण की विशेष जांच की जानी चाहिए। बीआरएस ने विशेष रूप से आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद दोनों राज्यों में एक ही व्यक्ति के नाम दर्ज होने की संभावना का उल्लेख करते हुए ऐसे मामलों के सत्यापन की मांग की।

बीआरएस ने सुझाव दिया कि डुप्लिकेट मतदाता पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आधार आधारित सत्यापन (जहां कानूनी रूप से अनुमति हो), फेशियल रिकग्निशन, जीआईएस मैपिंग, डी-डुप्लिकेशन सॉफ्टवेयर और जमीनी स्तर पर सत्यापन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए।

पार्टी ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 17, 18 और 62 का हवाला देते हुए कहा कि एक व्यक्ति का एक से अधिक स्थानों पर मतदाता पंजीकरण कानूनन स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उसने यह भी जोर दिया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। बीआरएस ने निष्पक्ष और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करने के लिए चुनाव आयोग के साथ हरसंभव सहयोग का भरोसा भी व्यक्त किया।

--आईएएनएस

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