अयोध्या, 28 जुलाई (आईएएनएस)। सावन मेला और कांवड़ यात्रा को लेकर अयोध्या नगर निगम ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। नगर निगम के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि पूरे एक महीने तक चलने वाले इन धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वच्छता, पेयजल, आश्रय और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए नगर निगम की टीमें लगातार मैदान में कार्य कर रही हैं।
गिरीश पति त्रिपाठी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि सावन मेले का पहला चरण कृष्ण पक्ष के दौरान होता है, जो महीने के शुरुआती 15 दिनों तक चलता है। इस अवधि में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है।
उन्होंने कहा कि आसपास के कई जिलों के श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर मां सरयू से पवित्र जल भरते हैं और कांवड़ के माध्यम से पैदल यात्रा करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा आस्था, तपस्या और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
मेयर ने बताया कि श्रद्धालु भगवान राम के पुत्रों द्वारा स्थापित माने जाने वाले नागेश्वर धाम मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक भी करते हैं। उन्होंने कहा कि सावन के पहले 15 दिनों तक अयोध्या पूरी तरह कांवड़ सेवा में समर्पित रहती है। इसके बाद सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया से मणि पर्वत पर झूला उत्सव का शुभारंभ होता है, जो अयोध्या की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है।
उन्होंने बताया कि झूला उत्सव के दौरान अयोध्या के लगभग हर मंदिर में भगवान के झूले की विशेष व्यवस्था की जाती है। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और भगवान के विग्रह को झूले पर विराजमान किया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को भगवान के विग्रह को झुलाने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जिससे पूरे शहर का धार्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय हो जाता है।
गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि पूरे माह चलने वाले इन आयोजनों के दौरान नगर निगम श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
उन्होंने बताया कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष टीमें लगातार कार्य कर रही हैं और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसके अलावा नगर निगम चार स्थानों पर वाटरप्रूफ शेड स्थापित कर रहा है, ताकि यदि बारिश के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी हो तो वे वहां सुरक्षित आश्रय ले सकें।