Indian Politics : दिल्ली में मुस्लिम बहुल इलाकों को टारगेट किया जा रहा : कासिम रसूल इलियास

तुर्कमान गेट मस्जिद कार्रवाई और जेएनयू विवाद पर एआईएमपीएलबी का तीखा हमला
दिल्ली में मुस्लिम बहुल इलाकों को टारगेट किया जा रहा : कासिम रसूल इलियास

नई दिल्ली: दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास चलाए गए तोड़फोड़ अभियान पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के प्रवक्ता कासिम रसूल इलियास ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मस्जिद से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और इस मामले में अदालत द्वारा स्टे ऑर्डर भी जारी किया गया है। इसके बावजूद दिल्ली पुलिस और एमसीडी द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई निंदनीय और कानून के खिलाफ है। दिल्ली में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है। पूरी दिल्ली में कई अवैध इमारतें मौजूद हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती, क्योंकि वे मुसलमानों की नहीं हैं।

जेएनयू में नारेबाजी को लेकर इलियास ने न्यायिक और प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी है कि यह विरोध उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत से जुड़ी सुनवाई को लेकर किया गया था। हालांकि, नारे लगाने वालों ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, जो एक अलग विषय है। उनका गुस्सा या विरोध उस तरह का नहीं था, जैसा दिखाया जा रहा है। अब एक खतरनाक पैटर्न बनता जा रहा है, जिसमें किसी भी तरह के विरोध या नारेबाजी पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट तैयार कर दी जाती है, जबकि बलात्कारियों और अपराधियों को आसानी से जमानत मिल जाती है। उन्होंने इसे अदालतों के दोहरे रवैये का उदाहरण बताते हुए काबिल-ए-ऐतराज करार दिया।

उमर खालिद के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर बात करते हुए सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि यह पहली बार है जब सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा सिद्धांत अपनाया है, जो भारत और आपराधिक न्याय प्रणाली के इतिहास में नया है। उन्होंने बताया कि एक ही एफआईआर और एक ही चार्जशीट, जिसमें एक ही घटना से जुड़े लोग शामिल हैं, उसमें कोर्ट ने आरोपियों को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया। कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को ‘वैचारिक आर्किटेक्ट’ बताया, जबकि अन्य आरोपियों को ‘फॉलोअर्स’ की श्रेणी में रखा गया। इलियास ने कहा कि पुलिस की चार्जशीट में इस तरह का कोई वर्गीकरण या अंतर नहीं किया गया है, जिससे यह फैसला कई सवाल खड़े करता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उमर खालिद के खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। उनके अनुसार, उमर खालिद को केवल दिल्ली दंगों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जबकि दंगों के समय वह न तो दिल्ली में मौजूद थे और न ही उन्होंने कोई भड़काऊ भाषण दिया था, जिससे हिंसा भड़की हो। इलियास ने कहा कि उमर खालिद ने केवल सीएए और एनआरसी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट अब सरकार के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर पाबंदी लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह फैसला कई गंभीर और संवैधानिक सवाल खड़े करता है।

कन्हैया कुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि कन्हैया कुमार अब एक राजनेता हैं और किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने के कारण उन पर कई तरह की राजनीतिक मजबूरियां हैं। उनका मानना है कि कन्हैया कुमार को लगता है कि उमर खालिद के मुद्दे पर खुलकर सवाल उठाने से उनके राजनीतिक हित प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से, जेएनयू में साथ रहने और 2016 की एफआईआर में दोनों के नाम आरोपी के तौर पर होने के बावजूद, कन्हैया कुमार खुद को इस पूरे मामले से अलग रख रहे हैं। राजनीतिक मजबूरियां उनकी बेड़ियां बन गई हैं। इस स्थिति में शायद वह ज्‍यादा कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

--आईएएनएस

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...