नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में जमीन कब्जे के मामले में फरार चल रहे टीएमसी महासचिव और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुमित रॉय ने शीर्ष कोर्ट से गिरफ्तारी जैसी सख्त पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की मांग की है।
इससे पहले सुमित रॉय ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। यह मामला अवैध जमीन कब्जाने से जुड़ा है। 3 अगस्त को जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
हालांकि उसी दिन कोर्ट ने 'सरकारी नौकरी के बदले पैसे' वाले दूसरे मामले में सुमित रॉय को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा था कि 10 दिन के अंदर उन्हें जांच एजेंसी के सामने पेश होना होगा।
सुमित रॉय का डर है कि अगर वे नौकरी वाले मामले में जांच के लिए पेश होते हैं तो पुलिस उन्हें जमीन वाले केस में गिरफ्तार कर सकती है। इसी आशंका के चलते उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से बीच-बचाव की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि जांच एजेंसी जब भी बुलाएगी वे पेश होंगे, लेकिन पहले उन्हें गिरफ्तारी से राहत दी जाए।
आरोप है कि सुमित रॉय ने पश्चिम मिदनापुर के सालबोनी में सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा कर बेच दिया था।
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और सुमित रॉय की तलाश की। जब वह अपने किसी भी पते पर नहीं मिले तो पश्चिम मिदनापुर की जिला अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
इसके बाद सुमित रॉय के वकील ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत मांगी। वकील ने मामले की जल्द सुनवाई और बेंच बदलने की भी मांग की थी, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया था। आखिर में मामला नियमित पीठ के सामने आया और जमानत याचिका खारिज हो गई।
पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी ने जून में ही सुमित के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था।
13 जून को सालबोनी थाने की पुलिस केंद्रीय बलों के साथ सुबह-सुबह दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची थी। पुलिस को सुमित रॉय के मोबाइल की आखिरी लोकेशन यहीं मिली थी। काफी देर इंतजार के बाद पुलिस ने ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया, लेकिन सुमित रॉय वहां नहीं मिले।