आईपीसी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणवत्ता व नवाचार को नई ऊंचाई दी, विकसित यूपी-विकसित भारत को मिला बल

आईपीसी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणवत्ता व नवाचार को नई ऊंचाई दी, विकसित यूपी-विकसित भारत को मिला बल

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, भारतीय औषध संहिता आयोग (आईपीसी) ने डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (डीएसएमएनआरयू), लखनऊ और सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीएसआईआर-सीआईएमएपी) के साथ दो समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर और नवीनीकरण करके विकसित उत्तर प्रदेश-विकसित भारत की परिकल्पना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया है।

इस समारोह में डीएसएमएनआरयू के कुलपति प्रोफेसर संजय सिंह, आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन और सीएसआईआर-सीआईएमएपी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएसआईआर-सीआईएमएपी के साथ नवीनीकृत समझौता ज्ञापन औषधीय पौधों के अनुसंधान, मानकीकरण और हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन में सहयोग जारी रखेगा।

डीएसएमएनआरयू के साथ हुए नए समझौता ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सहायक उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक प्रोटोकॉल विकसित करना है। यह सहयोग दिव्यांगजनों में दवा सुरक्षा जागरूकता और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए सांकेतिक भाषा में फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल के विकास में भी सहायता करेगा।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. वी. कलैसेल्वन ने कहा कि ये सहयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता मानकों और संस्थागत साझेदारियों को मजबूत करेंगे, जिससे उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवा और दवा गुणवत्ता के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उभरने में सहायता मिलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की पहल सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उत्पादों तक पहुंच में सुधार करके 'विकसित यूपी-विकसित भारत' के साझा दृष्टिकोण में प्रत्यक्ष योगदान देती हैं।

ये साझेदारियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं के समर्थन में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, वैज्ञानिक नवाचार और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए आईपीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं।

--आईएएनएस

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