23 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रसारण दिवस? जानिए इतिहास

23 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रसारण दिवस? जानिए इतिहास

पटना, 22 जुलाई (आईएएनएस)। आज के दौर में जब इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, तब भी रेडियो की अपनी एक खास पहचान है। देश के दूर-दराज इलाकों तक खबरें, शिक्षा और मनोरंजन पहुंचाने वाला रेडियो भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। हर साल 23 जुलाई को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मनाया जाता है। इस तारीख को चुने जाने के पीछे एक लंबा इतिहास है।

भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत आजादी से पहले हुई थी। साल 1923 में मुंबई के रेडियो क्लब ने देश में पहली बार रेडियो प्रसारण शुरू किया। यह एक छोटा सा प्रयास था, लेकिन यहीं से भारत में प्रसारण की नींव पड़ी। इसके कुछ महीनों बाद कलकत्ता (अब कोलकाता) में भी रेडियो क्लब की शुरुआत हुई और लोगों तक आवाज पहुंचाने का यह नया माध्यम धीरे-धीरे लोकप्रिय होने लगा।

इसके बाद 23 जुलाई 1927 को भारत में संगठित रेडियो प्रसारण की शुरुआत हुई। इसी दिन इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (आईबीसी) ने मुंबई और कोलकाता से आधिकारिक रूप से रेडियो सेवा शुरू की। यही वजह है कि हर साल 23 जुलाई को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

हालांकि, शुरुआती दौर में रेडियो सेवा को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आर्थिक परेशानियों के कारण इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। इसके बाद साल 1930 में सरकार ने रेडियो प्रसारण को अपने नियंत्रण में ले लिया और इसे भारतीय प्रसारण सेवा नाम दिया गया।

धीरे-धीरे भारत में रेडियो का विस्तार होने लगा। साल 1936 में भारतीय प्रसारण सेवा का नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया गया। यही वह दौर था जब रेडियो देश के लोगों तक सूचनाएं पहुंचाने का एक मजबूत माध्यम बनता गया। साल 1956 में आकाशवाणी नाम को अपनाया गया, जो आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

साल 1957 में विविध भारती सेवा की शुरुआत हुई। इस सेवा ने खासतौर पर हिंदी फिल्म संगीत को घर-घर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। एक समय था जब लोग अपने पसंदीदा गाने सुनने के लिए रेडियो के सामने बैठकर घंटों इंतजार करते थे। विविध भारती ने रेडियो को मनोरंजन का एक बड़ा माध्यम बना दिया।

रेडियो का महत्व सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। आजादी के आंदोलन के दौरान भी रेडियो ने अहम भूमिका निभाई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का आजाद हिंद रेडियो और कांग्रेस रेडियो जैसे माध्यमों ने लोगों तक आंदोलन से जुड़ी जानकारी पहुंचाई और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया।

आजादी के बाद भी रेडियो देश के विकास का साथी बना। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और जन जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए आकाशवाणी ने करोड़ों लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाई। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रेडियो लंबे समय तक सूचना का सबसे भरोसेमंद माध्यम रहा।

प्राकृतिक आपदाओं के समय भी रेडियो ने अपनी उपयोगिता साबित की है। जब कई बार अन्य संचार माध्यम काम करना बंद कर देते हैं, तब रेडियो के जरिए लोगों तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाई जाती हैं।

वर्तमान समय में ऑल इंडिया रेडियो यानी आकाशवाणी आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ रहा है। एफएम चैनलों से लेकर डिजिटल प्रसारण तक, रेडियो ने बदलते समय के साथ खुद को लगातार अपडेट किया है। आज आकाशवाणी देश की बड़ी आबादी तक पहुंच रखता है और कई भाषाओं व बोलियों में कार्यक्रम प्रसारित करता है।

--आईएएनएस

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