नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। आज की व्यस्त जीवनशैली में शारीरिक संतुलन और आंतरिक ऊर्जा को बनाए रखना एक चुनौती बन गया है। ऐसी स्थिति में उत्थित पार्श्वकोणासन एक ऐसा योगासन है, जो शरीर को ताजगी प्रदान करता है।
उत्थित का अर्थ है, खिंचाव, पार्श्व का अर्थ बगल और कोण का अर्थ एंगल हैं। यह एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर के पार्श्व (साइड) भाग में एक संपूर्ण और सुंदर पार्श्व-कोण बनता है। यह न केवल हमारी शारीरिक शक्ति और लचीलेपन को बढ़ाता है, बल्कि मन में स्थिरता और एकाग्रता भी लाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्थित पार्श्वकोणासन (विस्तारित पार्श्व कोण मुद्रा) खड़े होकर किए जाने वाले योगासनों में से एक सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक आसन है, जो पेट के अंगों की मालिश करता है, पाचन में सुधार लाता है, और पैरों व रीढ़ को मजबूत करता है। इसके अलावा, शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है और रीढ़ की हड्डी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही, यह छाती के विकास और साइटिका के दर्द में राहत दिलाता है। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति साइटिका से ज्यादा परेशान है, तो वे सबसे पहले डॉक्टर से सलाह करें।
इसको करना बेहद आसान है। इसके लिए सबसे पहले योगा मैट पर दोनों पैरों को एक दूसरे से दूर फैला लें। अब दाहिने पैर के पंजे को बाहर की तरफ घुटने से धीरे-धीरे मोड़ें और उसी मुद्रा में नीचे की ओर बैठें। फिर अपने दाएं हाथ को दाएं पैर के पास जमीन पर रखें और बाएं हाथ को ऊपर की ओर सीधा 90 डिग्री के एंगल में रखने की कोशिश करें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहने की कोशिश करें, फिर धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। हालांकि, शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को इसको करने में थोड़ी दिक्कत हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे आदत हो जाएगी और शरीर खुलने लगेगा। इसी प्रक्रिया को दूसरी तरफ (बाएं पैर को मोड़कर) दोहराएं।
गंभीर पीठ या गर्दन की चोट, उच्च/निम्न रक्तचाप, और माइग्रेन की स्थिति में इस आसन का अभ्यास करने से बचें।
--आईएएनएस
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