केरल हाई कोर्ट ने दलित छात्र सुसाइड मामले में आरोपी प्रोफेसर की जमानत याचिका खारिज की

केरल हाई कोर्ट ने दलित छात्र सुसाइड मामले में आरोपी प्रोफेसर की जमानत याचिका खारिज की

कोच्चि, 19 जून (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कन्नूर डेंटल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. एम. कोडंडा राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। डॉ. राम पर दलित छात्र नितिन राज को मौखिक रूप से परेशान करने का आरोप है, जिसकी अप्रैल में आत्महत्या से मृत्यु हो गई थी।

न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने डेंटल स्टूडेंट की मृत्यु के मामले में मुख्य आरोपी डॉ. राम द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया।

डेंटल कॉलेज के छात्र नितिन राज ने कथित तौर पर 10 अप्रैल को कॉलेज के पास एक इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।

उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि उनकी मृत्यु से पहले संकाय सदस्यों द्वारा उन्हें जाति आधारित उत्पीड़न और मानसिक क्रूरता का शिकार बनाया गया था।

उनके पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर, पुलिस ने डॉ. राम और दो अन्य स्टाफ सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराधों का मामला दर्ज किया।

डॉ. राम ने इससे पहले एक अन्य आरोपी फैकल्टी सदस्य, डॉ. संगीता नाम्बियार के साथ सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी।

सत्र न्यायालय ने 25 अप्रैल को डॉ. नाम्बियार को जमानत दे दी, लेकिन डॉ. राम की याचिका खारिज कर दी। अब उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया है।

जमानत याचिका का विरोध करते हुए राज्य ने तर्क दिया कि दो छात्रों द्वारा दिए गए बयानों से डॉ. राम द्वारा छात्रों के प्रति अनुचित व्यवहार का संकेत मिलता है।

अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि प्रोफेसर ने कथित तौर पर अन्य शिक्षकों को नितिन राज को परेशान करने के लिए उकसाया था।

सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों से बार-बार आ रही उत्पीड़न की शिकायतों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि सरकार को ऐसी शिकायतों की जांच करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित करने पर विचार करना चाहिए।

हालांकि, डॉ. राम के वकील ने जाति आधारित उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया और तर्क दिया कि छात्र की परेशानी से जुड़े अन्य कारक भी थे।

बचाव पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला दिया जिसमें नितिन राज अपनी मृत्यु से पहले कॉलेज के प्रिंसिपल के कमरे में दिखाई दे रहे थे और छात्र पर कथित ऋण वसूली के दबाव से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने डॉ. राम को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।

--आईएएनएस

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