गोलपाड़ा, 22 जून (आईएएनएस)। असम के गोलपाड़ा में डेंगू के 19 नए मामले सामने आए हैं। रबड़ के पेड़ों से दूध इकट्ठा करने वाले कप मच्छरों के पनपने की मुख्य जगह पाए गए हैं। इसके फैलाव को रोकने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।
जिला मलेरिया कार्यालय की अधिकारी ताराली ठाकुरिया आईएएनएस को बताया, "पहले गोलपाड़ा में डेंगू के केस स्थानीय स्तर पर नहीं थे। पिछले तीन साल में यहां डेंगू के मरीज बढ़े हैं। 2024 में 104 डेंगू के केस सामने आए थे।
जांच के दौरान रबड़ के पेड़ों से दूध इकट्ठा करने वाले कप में भरे पानी में डेंगू के लार्वा मिले थे। इससे रबड़ उद्योग पर निर्भर आदिवासी लोग डेंगू के शिकार हो गए। इस साल 96 डेंगू के मामले रबड़ की खेती वाले क्षेत्र में पाए गए हैं।"
ताराली ठाकुरिया ने बताया कि जिस क्षेत्र में डेंगू के मरीज मिल रहे हैं, वहां के लोगों जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। रबड़ किसानों को भी डेंगू से बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है। हम लोग किसानों को बता रहे हैं कि वह रबड़ के पेड़ों से दूध इकट्ठा करने वाले कप में भरे पानी को हर सप्ताह बदल दें, जिससे लार्वा पनपने न पाए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, डेंगू एक वायरल इन्फेक्शन है, जो डेंगू वायरस से होता है और संक्रमित मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है। दुनिया की लगभग आधी आबादी को डेंगू का खतरा है।
डेंगू दुनियाभर में ट्रॉपिकल (उष्णकटिबंधीय) और सब-ट्रॉपिकल इलाकोंm खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पाया जाता है। डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण वेक्टर कंट्रोल (मच्छरों को नियंत्रित करने) पर निर्भर करता है। डेंगू या गंभीर डेंगू का कोई खास इलाज नहीं है, लेकिन बीमारी का जल्दी पता चलने और सही मेडिकल देखभाल मिलने से गंभीर डेंगू से होने वाली मौतों की दर काफी कम हो जाती है।