Makar Sankranti Celebration : 'पतंगों के पीछे दौड़, तिल-गुड़ की खुशबू और बचपन', सन नियो के कलाकारों ने साझा की मकर संक्रांति की यादें

सन नियो कलाकारों ने मकर संक्रांति पर बचपन की यादें साझा कीं और त्योहार की खुशियों की बात की।
'पतंगों के पीछे दौड़, तिल-गुड़ की खुशबू और बचपन', सन नियो के कलाकारों ने साझा की मकर संक्रांति की यादें

मुंबई: सर्दियों की हल्की धूप और आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें मकर संक्रांति के त्योहार की पहचान हैं। इस मौके पर हर कोई अपने प्रियजनों के साथ समय बिताता है, खुशियां बांटता है और नए साल के लिए सकारात्मक सोच को अपनाता है। इस कड़ी में सन नियो के कलाकारों ने मकर संक्रांति के मौके पर त्योहार का मतलब समझाया और अपने बचपन के अनुभवों को साझा किया।

'दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी' में दिव्या का किरदार निभा रहीं मेघा रे ने कहा, ''मकर संक्रांति मेरे लिए हमेशा खास रही है। यह त्योहार सिर्फ मिठाई खाने या पतंग उड़ाने का मौका नहीं है, बल्कि खुशियों, उम्मीदों और परिवार के साथ जुड़ने का अवसर है। मैं बचपन में अपने परिवार के साथ पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ बांटने का आनंद उठाती थीं। यह यादें आज भी मेरे दिल में बसी हुई हैं।''

उन्होंने कहा, ''मैं इस साल काम की व्यस्तताओं के बीच भी सेट पर अपनी टीम के साथ त्योहार मनाऊंगी और मिठाइयां बांटूंगी। मकर संक्रांति हमें सिखाती है कि नकारात्मकता को छोड़कर विश्वास, कृतज्ञता और खुशी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मेरी तरफ से सभी को रंगों से भरी और खुशहाल मकर संक्रांति की शुभकामनाएं।''

'सत्या साची' में साची की भूमिका निभा रहीं भाग्यश्री मिश्रा ने भी बचपन की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा, ''मेरे लिए मकर संक्रांति नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बचपन की वो यादें, जब मैं रंगीन पतंगें उड़ाती थीं और कटी हुई पतंगों के पीछे पूरे जोश के साथ दौड़ती थी, आज भी दिल को खुश कर देती हैं। समय के साथ बड़े हो जाने और व्यस्तताओं के कारण त्योहार को मनाने का मौका कम मिलता है, लेकिन अगर मुझे काम के बीच मौका मिला, तो मैं सेट पर पतंग उड़ाकर अपने सहकर्मियों के साथ खुशी के पल बिताऊंगी। मेरा मानना है कि त्योहार केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन में उमंग और ऊर्जा का संदेश भी लेकर आता है।''

'बींदणी' में घेवर का किरदार निभा रहीं गौरी शेलगांवकर ने मकर संक्रांति को सादगी और अपनापन से जोड़ा। उन्होंने कहा, ''यह त्योहार परिवार के साथ समय बिताने, स्वादिष्ट खाना खाने और सीखने का अवसर होता है। बचपन में बड़े मुझे तिल-गुड़ देते और कहते थे कि हमेशा मीठा बोलो, सकारात्मक सोचो और खुश रहो। इस साल मैं सादगी से त्योहार मनाऊंगी, अपने प्रियजनों को फोन करूंगी और उनके प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद दूंगी।''

उन्होंने आगे कहा, ''अपनी मां के हाथों से बने तिल के लड्डू सेट पर ले जाऊंगी और सबके साथ बाटूंगी। बचपन में पापा के साथ पतंग उड़ाना खास अनुभव था और यह दिन मेरे दिल में हमेशा जीवित रहेगा।''

'दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी' शाम 7:30 बजे, 'सत्या साची' शाम 8:00 बजे और 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' रात 9:00 बजे सन नियो चैनल पर प्रसारित होते हैं।

--आईएएनएस

 

 

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