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मां की याद में भावुक हुए अदनान सामी, बोले-'मोबाइल में आज भी सेव है उनका नंबर, डिलीट नहीं कर पाता'

मां

मुंबई, 21 अगस्त (आईएएनएस)। संगीतकार और गायक अदनान सामी ने अपनी मां की 79वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की। अदनान की मां का निधन 2024 में हुआ था। मां के जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुए अदनान ने सोशल मीडिया पर उनकी कुछ तस्वीरें साझा कीं और बताया कि वक्त बीतने के बाद भी मां की कमी उनके जीवन में वैसी ही बनी हुई है। उन्होंने बताया कि उनकी मां का नाम और मोबाइल नंबर आज भी उनके मोबाइल में सेव है और वह उसे डिलीट नहीं कर पाते।

अदनान ने अपनी मां को याद करते हुए लिखा, ''आज मेरी मां का जन्मदिन है और मुझे आज भी उनकी बहुत याद आती है। मुझे उनकी हंसी याद आती है। जीवन को लेकर उनका खास नजरिया याद आता है, उनकी कही हुई हर बात याद आती है। उनके जाने के बाद मेरे जीवन में एक ऐसी जगह खाली हो गई है, जिसे कोई और कभी नहीं भर सकता।''

अदनान ने कहा, ''मेरी बेटी मदीना भी अपनी दादी को बहुत याद करती है। उनके निधन को काफी समय बीत गया लेकिन आज भी मेरी मां का नाम और नंबर मेरे फोन में मौजूद है। वह नंबर मेरे फेवरेट्स कॉन्टैक्ट्स और स्पीड डायल में सेव है। मैं जानता हूं कि अब उस नंबर से कभी फोन नहीं आएगा। मेरी मां का नाम मेरी मोबाइल की स्क्रीन पर दोबारा नहीं चमकेगा। इसके बावजूद मैं उस नंबर को डिलीट नहीं कर पा रहा हूं।''

अदनान ने कहा, ''मैं उस नाम और नंबर को हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। मेरे लिए मोबाइल में सेव वह नंबर सिर्फ एक कॉन्टैक्ट नहीं बल्कि मां से जुड़ी एक याद है। मैं उसे अपने पास रखना चाहता हूं।''

अदनान ने अपनी पोस्ट के जरिए लोगों से अपने माता-पिता की कद्र करने की अपील भी की। उन्होंने कहा, ''अगर आपके फोन पर आज भी आपकी मां का नाम दिखाई देता है, तो आप उस कॉल का जवाब जरूर दें। जब तक माता-पिता हमारे साथ हैं, तब तक हमें उनके साथ मिले इस समय की कद्र करनी चाहिए। एक दिन ऐसा आएगा जब फोन की स्क्रीन पर मां का नाम दिखाई देना बंद हो जाएगा और फिर वह दोबारा कभी नहीं आएगा।''

पोस्ट के आखिर में अदनान ने अपनी मां को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह आज भी उनसे बहुत प्यार करते हैं।

अदनान सामी के संगीत करियर की बात करें तो उन्होंने भारतीय संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी के साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम जैसी कई भाषाओं में गा चुके हैं। संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया है। पियानो उनके सबसे पसंदीदा वाद्ययंत्रों में से एक है और इसी के साथ उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को भी अलग अंदाज में पेश किया है।

--आईएएनएस

पीके/पीएम