कोविड वायरस की उत्पत्ति पर सच जानना मुश्किल, चीन के असहयोग पर उठे सवाल

कोविड वायरस की उत्पत्ति पर सच जानना मुश्किल, चीन के असहयोग पर उठे सवाल

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिका लंबे समय से ये दावे करता रहा है कि पूरे विश्व में लाखों लोगों की जान लेने वाला कोरोना वायरस चीन के लैब में बनाया गया और इस दावे को साबित करने के लिए जांच भी कर रहा है। हालांकि, एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के सहयोग न करने की वजह से अमेरिका के लिए यह तय करना बेहद मुश्किल हो गया है कि वायरस वुहान की लैब में तैयार किया गया था या नहीं।

इसके साथ ही, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह तय करना कि अमेरिकी एजेंसियों ने उस रिसर्च को फंड किया या उसमें सहयोग किया, काफी हद तक अमेरिका के अपने अधिकार में है।

नेशनल रिव्यू में जियानली यांग ने लिखा है कि अब समय आ गया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को "फिफ्थ अमेंडमेंट का सहारा लेने" की अनुमति देना बंद किया जाए। लेख में कहा गया है कि अमेरिकी संविधान का फिफ्थ अमेंडमेंट नागरिकों को आत्म अभियोग से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन बीजिंग ने इसे अपनी शासन व्यवस्था का एक सिद्धांत बना लिया है।

लेखक के अनुसार, अमेरिका को एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और वैज्ञानिक अभियान का नेतृत्व करना चाहिए, ताकि चीन पर वास्तविक सहयोग के लिए दबाव बनाया जा सके।

लेख में दावा किया गया है कि कोविड महामारी की शुरुआत से ही चीनी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य सहयोग की भावना और दायित्वों का उल्लंघन किया। अधिकारियों ने महामारी के बारे में चेतावनी देने वाले डॉक्टरों को दबाया, पत्रकारों की आवाज को रोका, वैज्ञानिकों पर सेंसरशिप लगाई, शुरुआती आंकड़ों तक पहुंच सीमित की, महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तक स्वतंत्र पहुंच देने से इनकार किया, ऑनलाइन डेटाबेस हटाए और जांच की हर प्रक्रिया को नियंत्रित किया।

रिपोर्ट के अनुसार, महामारी की उत्पत्ति का पता लगाने की हर गंभीर कोशिश को बीजिंग द्वारा खड़ी की गई राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ा।

लेख में यह भी कहा गया है कि यदि अमेरिकी कांग्रेस वास्तव में कोविड-19 की उत्पत्ति की जांच को आगे बढ़ाना चाहती है, तो उसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज, ईकोहेल्थ एलायंस और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के बीच संबंधों की व्यापक और विश्वसनीय जांच करानी चाहिए।

लेखक के मुताबिक ऐसी जांच न केवल अमेरिका की जवाबदेही स्पष्ट करेगी, बल्कि महामारी के वास्तविक स्रोत से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत भी सामने ला सकती है। लेख में यह सवाल भी उठाया गया है कि असली रहस्य यह नहीं है कि चीन ने जांच में बाधा डाली, क्योंकि यह बात स्पष्ट है, बल्कि यह है कि दुनिया के कई देशों ने अंततः इस बाधा को क्यों स्वीकार कर लिया।

यांग का कहना है कि "पिछली एक सदी की सबसे बड़ी महामारी के पीड़ित केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि सच्चाई के हकदार हैं।"

इससे पहले अमेरिका के पूर्व शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने सीनेट समिति के समक्ष आत्म-अभियोग से बचाव के अपने संवैधानिक अधिकार (फिफ्थ अमेंडमेंट) का बार-बार इस्तेमाल किया था। सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सांसदों ने चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में अमेरिकी फंडिंग से जुड़े कोरोना वायरस अनुसंधान और कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर सवाल उठाए थे।

पिछले महीने सीनेट होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंटल अफेयर्स कमेटी की सुनवाई में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। समिति के अध्यक्ष रैंड पॉल ने फाउची पर वुहान में "खतरनाक गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च" को फंडिंग देने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया और बाद में संकेत दिया कि सवालों के जवाब देने से इनकार करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

--आईएएनएस

केके/वीसी