नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। भारत में कुल इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या तिमाही आधार पर 6.24 प्रतिशत बढ़कर 1.09 अरब हो गई है, जो कि दिसंबर 2025 में 1.02 अरब थी। यह जानकारी टेलीकॉम नियामक की ओर से जारी रिपोर्ट में दी गई।
ट्राई की रिपोर्ट में कहा गया कि कुल इंटरनेट सब्सक्राइबर्स में से 1.04 अरब वायरलेस हैं, जबकि 4.6 करोड़ बायर (तार) के माध्यम से इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही बताया कि इसमें से 1.06 अरब ब्रॉडबैंड और 2.6 करोड़ नैरोबैंड सब्सक्राइबर्स हैं।
मार्च 2026 तक ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर बेस में तिमाही आधार पर 5.81 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि नैरोबैंड सब्सक्रिप्शन में 26.62 प्रतिशत का उछाल आया।
वायरलाइन टेली-डेंसिटी दिसंबर 2025 के आखिर में 3.33 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 के आखिर में 3.38 प्रतिशत हो गई, जिसमें 1.64 प्रतिशत की तिमाही विकास दर रही।
कुल टेलीफोन सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर 1.33 अरब हो गई है, जिससे कुल टेली-डेंसिटी पिछली तिमाही के 91.74 प्रतिशत से बढ़कर 93.26 प्रतिशत हो गई।
इस बीच, वायरलेस सर्विस के लिए प्रति यूजर औसत रेवेन्यू तिमाही आधार पर 0.76 प्रतिशत बढ़कर 196.04 रुपये हो गया, और सालाना आधार पर मासिक एआरपीयू में 7.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
देश मे एक माह में प्रति यूजर इस्तेमाल होने वाले औसत प्रिपेड मिनट्स मार्च 2026 में बढ़कर 1017 पर पहुंच गए हैं। यह आंकड़ा दिसंबर 2025 को समाप्त होने वाली तिमाही में 1012 पर था, जो तिमाही आधार पर 0.43 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है।
दिसंबर 2025 में समाप्त हुई तिमाही के लिए लाइसेंस फीस 6,733 करोड़ रुपये थी, जो अगली तिमाही में बढ़कर 6,936 करोड़ रुपये हो गई है।
मार्च तिमाही में लाइसेंस फीस की तिमाही और सालाना ग्रोथ रेट क्रमशः 3.02 प्रतिशत और 9.41 प्रतिशत रही।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कुल 917 प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों को सिर्फ अपलिंकिंग/सिर्फ डाउनलिंकिंग/अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग दोनों के लिए मंजूरी दी है।
भारत में डाउनलिंकिंग के लिए उपलब्ध मंजूरी प्राप्त 908 सैटेलाइट टीवी चैनलों में से, मार्च के अंत तक 342 सैटेलाइट पे टीवी चैनल चालू थे।
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