नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने भारत के भौगोलिक संकेत (जीआई) उत्पादों के व्यवसायीकरण और उन्होंने वैश्विक बाजार तक पहुंच प्रदान करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह जानकारी सरकारी की ओर से मंगलवार को दी गई।
भारत में भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत भौगोलिक संकेतों के पंजीकरण एवं कानूनी संरक्षण के लिए डीपीआईआईटी नोडल विभाग है, जबकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय देश भर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के विकास, वित्तीय सुदृढ़ता तथा समग्र उन्नति को बढ़ावा देने वाला नोडल मंत्रालय है।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह समझौता ज्ञापन भारतीय भौगोलिक संकेत उत्पादों के व्यवसायीकरण, गुणवत्ता मानकीकरण और बाजार में पैठ बढ़ाने के लिए एक सहयोगात्मक प्रारूप स्थापित करता है, जिससे स्वदेशी कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आजीविका में सुधार होगा और साथ ही देश में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।
संयुक्त पहल के रूप में, दोनों संगठन अपने कार्यक्रम डिजाइन और हस्तक्षेपों में ओडीओपी को एकीकृत करने की दिशा में काम करेंगे, एक समर्पित "भारत जीआई" बैनर के अंतर्गत डिजिटल वाणिज्य के लिए ओपन नेटवर्क (ओएनडीसी) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर जीआई समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को शामिल करने में सहयोगात्मक रूप से सुविधा प्रदान करेंगे, और जीआई उत्पादों के घरेलू और वैश्विक विपणन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों, क्रेता-विक्रेता बैठकों और प्रदर्शनियों में समर्पित जीआई पवेलियन को सह-प्रायोजित करेंगे।
सरकार ने आगे कहा कि यह समझौता ज्ञापन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के बौद्धिक संपदा संरक्षण संबंधी दायित्व और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के उद्यम विकास संबंधी दायित्व को संरेखित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस सहयोग से कारीगरों, बुनकरों और उत्पादक समूहों के लिए क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तिकरण और बेहतर बाजार पहुंच को सुगम बनाकर भारत के भौगोलिक संकेत (जीआई) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलने की आशा है।
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