अमरावती, 7 अगस्त (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश राज्य में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 1,600 मेगावाट कोयले से चलने वाली थर्मल बिजली खरीदेगा।
आंध्र प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने राज्य की बिजली वितरण कंपनियों को खरीद के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया शुरू करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, बिजली की खरीद 'डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन और ऑपरेट' मॉडल का इस्तेमाल करते हुए इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 63 के तहत टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (दर-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली) के जरिए की जाएगी।
बोली लगाने की प्रक्रिया केंद्रीय बिजली मंत्रालय द्वारा जारी किए गए 'रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन', 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' और 'पावर सप्लाई एग्रीमेंट' जैसे स्टैंडर्ड डॉक्युमेंट्स पर आधारित होगी।
प्रस्तावित खरीद उन पावर डेवलपर्स के लिए एक बड़ा मौका है, जो आंध्र प्रदेश में लंबे समय के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट चाहते हैं, क्योंकि वहां आने वाले दशक में बिजली की खपत और पीक डिमांड में काफी बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
1,600 मेगावाट की खरीद आंध्र प्रदेश के लंबे समय के थर्मल क्षमता बढ़ाने के कार्यक्रम का पहला चरण है।
आंध्र प्रदेश के लिए सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की 'रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान' (संसाधन पर्याप्तता योजना) ने वित्त वर्ष 2035-36 तक कोयले से चलने वाली लगभग 5,588 मेगावाट की थर्मल बिजली उत्पादन क्षमता को चरणबद्ध तरीके से जोड़ने की सिफारिश की है।
इसमें से राज्य में बिजली की मांग और पीक लोड में होने वाली अनुमानित बढ़ोतरी को पूरा करने के लिए पहले चरण में 1,600 मेगावाट बिजली खरीदने का प्रस्ताव है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब आंध्र प्रदेश अलग-अलग सेक्टर में औद्योगिक गतिविधियों, शहरी बुनियादी ढांचे और बिजली की ज्यादा खपत वाले निवेश का विस्तार कर रहा है।
उम्मीद है कि योजनाबद्ध थर्मल क्षमता से भरोसेमंद और जरूरत के हिसाब से उपलब्ध (डिस्पैचेबल) बिजली मिलेगी, जो ज्यादा मांग और कम रिन्यूएबल-एनर्जी उत्पादन के समय ग्रिड को सहारा दे सकेगी।
रिलीज में कहा गया है कि यह आंध्र प्रदेश के बढ़ते रिन्यूएबल-एनर्जी पोर्टफोलियो को भी मजबूत करेगा। यह शाम के समय ज्यादा बिजली की जरूरत मौसम के हिसाब से होने वाले बदलावों और उन समयों में जब हवा और सोलर से बिजली नहीं बन पाती, भरोसेमंद बिजली की सप्लाई पक्का करेगा।
रेगुलेटर ने डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों से यह पक्का करने के लिए भी कहा है कि प्रस्तावित क्षमता को प्राथमिकता के तौर पर आंध्र प्रदेश राज्य ट्रांसमिशन नेटवर्क से जोड़ा जाए।
आयोग के अनुसार, इससे राज्य के ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है और इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के जरिए कनेक्टिविटी पाने से जुड़े जोखिम और देरी कम हो सकती है।
हालांकि, अंतर-राज्य नेटवर्क से जुड़े प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जा सकती है। अगर आंध्र प्रदेश की सीमा पर बिजली की 'लैंडेड कॉस्ट' (पहुंचने तक की लागत), राज्य नेटवर्क से जुड़े बिजली उत्पादन की लागत से कम हो।
--आईएएनएस
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