नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को भारत के बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी बायोटेक उत्पादों और तकनीकों को उद्योग तथा निवेशकों से मजबूत समर्थन मिलना चाहिए, ताकि प्रयोगशालाओं में विकसित होने वाले नवाचार तेजी से बाजार तक पहुंच सकें और उनका व्यावसायीकरण हो सके।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी में बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, उद्योग और निवेशकों के बीच मजबूत तालमेल स्थापित करना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे देश में विकसित नई तकनीकों और उत्पादों को तेजी से व्यावसायिक सफलता मिल सकेगी और भारत वैश्विक बायोटेक हब के रूप में उभर सकेगा।
बैठक में बीआईआरएसी रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड (बीआईआरएसी-आरडीआईएफ) के क्रियान्वयन, उद्योग की भागीदारी बढ़ाने, लाइफ साइंसेज ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) को भारतीय बायोटेक पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) निवेश को बढ़ावा देने और बायोटेक स्टार्टअप्स के लिए निवेशकों से बेहतर जुड़ाव जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बयान में कहा गया कि बीआईआरएसी-आरडीआईएफ केंद्र सरकार के 1 लाख करोड़ रुपए के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) फंड का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गहन तकनीकी (डीप-टेक) नवाचारों और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत बायोटेक सेक्टर में तकनीकी रूप से उन्नत और उच्च जोखिम वाले प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इस फंड के तहत स्टार्टअप्स और उद्योगों को 5 करोड़ रुपए से लेकर 200 करोड़ रुपए तक की सहायता मिल सकेगी। वहीं, कुल परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। सहायता बिना गिरवी वाले दीर्घकालिक ऋण, इक्विटी और हाइब्रिड वित्तीय साधनों के रूप में दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य निजी निवेश को आकर्षित कर बायोटेक क्षेत्र में बड़े स्तर पर पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।
बीआईआरएसी ने इस योजना के प्रभावी संचालन के लिए एक समर्पित आरडीआईएफ डिवीजन भी बनाया है। फरवरी 2026 में शुरू किए गए पहले राष्ट्रीय आवेदन आमंत्रण के तहत अब तक 198 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से शुरुआती 50 प्रस्तावों की जांच पूरी हो चुकी है और अब तक 8 पात्र तकनीकी इकाइयों का चयन किया गया है, जो आगे विस्तृत मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजर रही हैं।
बैठक में देश के तेजी से बढ़ रहे लाइफ साइंसेज ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) को भी भारतीय बायोटेक उद्योग से जोड़ने पर जोर दिया गया। वर्तमान में भारत में 1,700 से अधिक जीसीसी संचालित हैं, जिनमें करीब 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। इनमें लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर जीसीसी जैव-फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और डिजिटल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं।
बीआईआरएसी इन जीसीसी को भारत की बायो-इन्क्यूबेशन सुविधाओं, बायोई3 बायो-फाउंड्रीज और स्टार्टअप्स के साथ जोड़कर सहयोग का नया प्लेटफॉर्म तैयार करेगा, जिससे घरेलू कंपनियों और वैश्विक संगठनों के बीच तकनीकी एवं व्यावसायिक साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है।
बैठक में सीएसआर निवेश को बायोटेक्नोलॉजी आधारित सामाजिक नवाचारों से जोड़ने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। बीआईआरएसी का मानना है कि बढ़ते सीएसआर फंड को सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं, डायग्नोस्टिक्स, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, जलवायु-अनुकूल कृषि और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए बीआईआरएसी अपनी वैज्ञानिक मूल्यांकन क्षमता और देशव्यापी नेटवर्क का उपयोग करेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायोटेक स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाने को आसान बनाने पर भी जोर दिया। इसके लिए बीआईआरएसी स्टार्टअप इन्वेस्टर कनेक्ट नामक एक विशेष प्लेटफॉर्म प्रस्तावित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म निवेशकों और निवेश के लिए तैयार बायोटेक स्टार्टअप्स को एक साथ लाएगा, जिससे रणनीतिक साझेदारियां बढ़ेंगी और नई तकनीकों के व्यावसायीकरण की प्रक्रिया तेज होगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य भारतीय नवाचारों को प्रयोगशाला से बाजार तक तेजी से पहुंचाना और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के अनुरूप एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बायोटेक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।
--आईएएनएस
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