चारधाम यात्रा के दौरान स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए जिला प्रशासन ने गंगा और यमुना घाटी में व्यापक स्तर पर वृहद स्वच्छता अभियान तेज कर दिया है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर यात्रा मार्गों, प्रमुख पड़ावों और बाजार क्षेत्रों में नियमित सफाई कर प्लास्टिक एवं कूड़ा मुक्त वातावरण बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
इसी क्रम में रविवार को गंगा घाटी क्षेत्र में नगर पंचायत गंगोत्री और भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने संयुक्त रूप से भैरव घाटी में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। अभियान के दौरान यात्रा मार्ग के साथ-साथ आसपास के वन क्षेत्रों में फैले प्लास्टिक कचरे, पानी की बोतलों, खाद्य सामग्री के रैपर्स तथा अन्य अपशिष्ट को एकत्रित किया गया। संयुक्त टीम ने लगभग 70 से 80 किलोग्राम सूखा कूड़ा एकत्र कर उसे निस्तारण के लिए भेजा।
भैरव घाटी को चारधाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पड़ाव माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में क्षेत्र को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रशासन विशेष निगरानी रख रहा है। अभियान के दौरान लोगों से भी यात्रा मार्गों पर कूड़ा न फैलाने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की गई।
दूसरी ओर यमुना घाटी में भी स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अभियान लगातार जारी है। गंगनानी, खरादी, कुथनौर, पालीगाड, स्यानाचट्टी और रानाचट्टी सहित विभिन्न पड़ावों एवं बाजार क्षेत्रों से नियमित रूप से कूड़ा एकत्र किया जा रहा है। एकत्रित कचरे को प्रतिदिन वाहनों के माध्यम से डंपिंग जोन और निस्तारण केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है ताकि यात्रा मार्गों पर गंदगी जमा न हो और स्वच्छता व्यवस्था बनी रहे।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सभी संबंधित विभागों, नगर निकायों और अधिकारियों को निर्देशित किया है कि चारधाम यात्रा अवधि के दौरान सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। उन्होंने यात्रा मार्गों को प्लास्टिक मुक्त बनाने, नियमित सफाई अभियान संचालित करने तथा कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है।
चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है। प्रशासन का मानना है कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जनसहभागिता से ही हिमालयी क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक स्थलों की पवित्रता को बनाए रखा जा सकता है।