ललित मोदी को बड़ी राहत, आईपीएल 2009 के मामले में बरी

ललित मोदी को बड़ी राहत, आईपीएल 2009 के मामले में बरी

नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी को बड़ी राहत मिली है। उन्हें साल 2009 में साउथ अफ्रीका में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से जुड़े मुख्य मामले में बरी कर दिया गया है। स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स एक्ट (एसएएफईएमए) के तहत अपीलेट ट्रिब्यूनल ने उन पर लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के उस मुख्य तर्क को खारिज कर दिया कि विदेशी रेमिटेंस 'कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन' थे।

16 साल से ज्यादा समय तक चली जांच, कार्यवाही और कानूनी लड़ाई के बाद फैसला सुनाते हुए ट्रिब्यूनल ने पाया कि आईपीएल 2009 से जुड़े मुख्य रेमिटेंस 'करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन' थे। ट्रिब्यूनल ने यह भी तय किया कि बीसीसीआई के कानूनी एफईएमए नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी उनकी नहीं थी और न ही उन्हें ईडी के आरोपों के मुताबिक कोई वित्तीय अधिकार दिया गया था।

इसे आईपीएल के 2009 साउथ अफ्रीका एडिशन से जुड़े सबसे बड़े कानूनी विवाद का अंत बताते हुए ललित मोदी ने कहा, "यह उस सबसे अहम कानूनी मामले का अंत है, जो 2009 के साउथ अफ्रीका आईपीएल से पनपा था। 16 साल से ज्यादा समय तक मैंने लगातार एक ही बात कही है: मैंने नेक नीयत से, भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के भले के लिए काम किया और कोई निजी गलत काम नहीं किया।"

ललित मोदी ने बताया कि टूर्नामेंट को साउथ अफ्रीका ले जाने का फैसला असाधारण हालात में लिया गया था। उस समय भारत में आम चुनाव के कारण देश में इस इवेंट को आयोजित करना नामुमकिन हो गया था।

उन्होंने कहा, "उस सीजन के सफल आयोजन ने सुनिश्चित किया कि आईपीएल चलता रहे और आखिरकार दुनिया की सबसे कीमती स्पोर्ट्स प्रॉपर्टी में से एक बन जाए। इन कार्यवाहियों के दौरान, मैंने कानूनी प्रक्रिया में सहयोग किया। मुझे भरोसा था कि आखिरकार सच और कानून की ही जीत होगी।"

इस फैसले को सिर्फ अपनी निजी जीत से कहीं ज्यादा बताते हुए ललित मोदी ने कहा, "यह फैसला सिर्फ मेरी निजी जीत नहीं है। यह सही कानूनी प्रक्रिया, निष्पक्ष कानूनी विश्लेषण और इस सिद्धांत की अहमियत को फिर से साबित करता है कि आरोपों को आखिरकार सबूत और कानून की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि समय ही सबसे बड़ा निर्णायक होता है। आज, 16 साल से ज्यादा समय के बाद, उस प्रक्रिया का फैसला सामने आ गया है। मेरा पूरा ध्यान भविष्य पर है। मैं सम्मान और कृतज्ञता के साथ इस अध्याय को पीछे छोड़ते हुए ग्लोबल स्पोर्ट्स, बिजनेस और समाजसेवा के क्षेत्रों में आगे बढ़ने के मौके तलाशता रहूंगा।"

--आईएएनएस

आरएसजी/एबीएम