नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय शटलर त्रिशा जॉली पिछले तीन महीनों से खुद को वर्ल्ड चैंपियनशिप के पोडियम पर खड़े होने की कल्पना कर रही थीं, आखिरकार उनका सपना सच हुआ। शनिवार को त्रिशा ने जोड़ीदार गायत्री गोपीचंद के साथ विमेंस डबल्स इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
त्रिशा और गायत्री को सेमीफाइनल में मौजूदा चैंपियन चीन की लियू शेंग शू और टैन निंग के हाथों 21-18, 13-21, 8-21 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इससे पहले ही भारतीय जोड़ी विमेंस डबल्स में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर चुकी थी। यह साल 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के ब्रॉन्ज मेडल के बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप के इस इवेंट में देश का पहला मेडल था।
त्रिशा ने 'आईएएनएस' से कहा, "मैंने सच में हर दिन उस पोडियम पर होने की कल्पना की थी। मुझे लगता है कि कहीं न कहीं वह सोच, वह विश्वास काम आया। आप हर दिन उसके लिए सपना देखते हैं। हर दिन आप खुद को उसे हासिल करते हुए देखते हैं। मुझे लगता है कि आज आप इसे असल में होते हुए देख सकते हैं।"
भारतीय जोड़ी ने क्वार्टर फाइनल में चौथी वरीयता प्राप्त जिया यी फैन और झांग शू जियान को हराकर अपना मेडल सुनिश्चित किया था। चुनौतियों से पार पाने में मदद करने वाली सोच के बारे में बात करते हुए त्रिशा ने कहा कि उन्होंने आक्रामकता और शांति के बीच सही संतुलन बनाना सीख लिया है।
उन्होंने कहा, "मैं इस टूर्नामेंट में, शांति और आक्रामकता के बीच सही तालमेल बिठा पा रही थी। जब मुझे आक्रामकता क जरूरत होती है, तो बस उसका इस्तेमाल करती हूं। जब मुझे ऐसी स्थिति में होना होता है जहां मुझे हालात को संभालना हो, तो मुझे बस शांत रहना होता है। मुझमें यह बदलाव आया। इससे हमें भी मदद मिली। मुझे लगता है कि चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते समय आप आसानी से प्वाइंट नहीं दे सकते। आपको पहले प्वाइंट से लेकर 21वें प्वाइंट तक सतर्क रहना होता है।"
यह सोच उनके पूरे टूर्नामेंट के दौरान स्पष्ट तौर पर नजर आई, खासकर चौथी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में। त्रिशा ने कहा, "मुझे लगता है कि हमने यहां यही किया। हम बहुत सतर्क थे और उन्हें आसानी से कोई भी प्वाइंट नहीं देना चाहते थे। हमारे मन में यह बात थी कि हमसे प्वाइंट हासिल करने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़े। इस रणनीति ने वाकई काम किया। क्वार्टर फाइनल मैच के आखिर में चीनी खिलाड़ी दबाव में आ गए क्योंकि हम बहुत सतर्क थे और उन्हें आसानी से प्वाइंट नहीं दे रहे थे। इससे हमें सच में मदद मिली।"
वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने से चूकने के बावजूद, त्रिशा ने कहा कि यह मेडल ऐसी उपलब्धि है जिसे वह जीवन भर याद रखेंगी। उन्होंने कहा, "यह एक तरह से सपना सच होने जैसा है। अर्जुन अवॉर्ड मिलना, वर्ल्ड चैंपियनशिप का मेडलिस्ट बनना... मुझे लगता है कि यह हफ्ता बहुत शानदार रहा। मुझे लगता है कि मैं अपनी पूरी जिंदगी इन पलों को याद रखूंगी।"
--आईएएनएस
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