कोलंबो, 22 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और श्रीलंका के बीच रविवार से कोलंबो के एसएससी ग्राउंड में दूसरे टेस्ट मैच की शुरुआत होगी, जिससे पहले टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने टीम की रैंकिंग और मीडिया की बढ़ती नजर को लेकर चिंताओं को खारिज कर दिया। गंभीर ने बताया कि उनकी एकमात्र प्राथमिकता लोकप्रियता हासिल करना नहीं, बल्कि टीम के लिए ट्रॉफियां जीतना है।
भारत ने सीरीज का पहला मैच 165 रन से अपने नाम किया था। अब सीरीज का दूसरा और अंतिम मैच 23 अगस्त से शुरू होगा, जो निर्णायक रहेगा। मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने कहा, "मेरा काम ट्रॉफी जीतना है, व्यूज और लाइक्स पाना नहीं। मैं बस इसी में यकीन रखता हूं और यही मुझमें और बाकी लोगों में फर्क है।"
गंभीर ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि टीम बदलाव के दौर से गुजरने के कारण टेस्ट में संघर्ष कर रही है, जिसकी वजह से वे इस फॉर्मेट में चौथे नंबर पर आ गए हैं। उन्होंने कहा, "बिल्कुल नहीं। हम उतना संघर्ष नहीं कर रहे हैं। रैंकिंग मायने नहीं रखती। मुझे लगता है कि हम बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं और मुझे यकीन है कि प्रेस बॉक्स और कमेंट्री बॉक्स में बैठे लोग जानते हैं कि हम बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। इसके बावजूद, उतार-चढ़ाव तो आएंगे ही, इंग्लैंड दौरे के बाद पिछले एक साल में हमने काफी हद तक लगातार अच्छा क्रिकेट खेला है, टेस्ट क्रिकेट भी। इसलिए मुझे लगता है कि आप लोग रैंकिंग पर ध्यान दे सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं करते, क्योंकि जानते हैं कि हम जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, वह सही दिशा है।"
गंभीर ने खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट और सिलेक्शन कमेटी के प्रमुख अजीत अगरकर के साथ अपनी तालमेल पर भी बात की। अगरकर भी टीम के साथ कोलंबो में हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अहम मुकाबलों के लिए मुख्य खिलाड़ी उपलब्ध रहें।
उन्होंने कहा, "हमने हर एक चीज पर चर्चा की है। यह सिर्फ बीसीसीआई के साथ नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि हमारे सबसे अच्छे खिलाड़ी अधिक से अधिक क्रिकेट खेलें। यह भारतीय क्रिकेट के लिए भी अच्छा है क्योंकि अगर लगातार खेलते रहेंगे और हम अपने सबसे अच्छे खिलाड़ियों को सही रास्ते पर ला पाएंगे, तो इससे हमें अच्छे नतीजे भी मिलेंगे। काश मैं आपको उन बातचीत के बारे में बता पाता जो मेरे और सेलेक्टर्स के चेयरमैन के बीच होती हैं। यह बातचीत इस बारे में होती है कि हम भारतीय क्रिकेट को कैसे आगे ले जाना चाहते हैं, क्या जरूरी है और भारतीय क्रिकेट की बेहतरी के लिए सही फैसले क्या हैं। एक हेड कोच और सेलेक्टर्स के चेयरमैन के बीच और क्या बातचीत हो सकती है? तो शायद यह सब भारतीय क्रिकेट के बारे में ही होता है कि हम भारतीय क्रिकेट को कैसे आगे बढ़ते हुए देखते हैं।"
गंभीर ने लंबी द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज की भी वकालत की और छोटी दो-मैच वाली सीरीज के बजाय तीन-मैच वाली टेस्ट सीरीज को ज्यादा पसंद किया। उन्होंने कहा, "देखिए, आदर्श रूप से मैं तीन टेस्ट मैचों की सीरीज चाहूंगा। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि पहला टेस्ट मैच हारने वाली टीम के पास वापसी करने और सीरीज जीतने का मौका होना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि कभी-कभी दो टेस्ट मैचों की सीरीज में, अगर आप पहला टेस्ट मैच हार जाते हैं, तो दूसरी टीम के पास वापसी करने और सीरीज जीतने का कोई मौका नहीं बचता। ज्यादा से ज्यादा आप सीरीज ड्रॉ करवा सकते हैं। लेकिन हां, कम समय में मैच होना ठीक है। दूसरी टीमें भी ऐसा कर रही हैं। हम प्रोफेशनल क्रिकेटर हैं। हम जानते हैं कि अपने शरीर को कैसे मैनेज करना है। हम यह भी जानते हैं कि जल्दी रिकवर कैसे करना है।"
उन्होंने कहा, "इसीलिए कुछ दिन ऐसे होते हैं जब हम खिलाड़ियों को ऑप्शनल प्रैक्टिस या तेज गेंदबाजों को आराम देते हैं, क्योंकि हम सभी जानते हैं कि इन हालात में तेज गेंदबाजों के लिए यह बहुत मुश्किल हो सकता है। इसलिए हम इसे मैनेज करने की कोशिश करते हैं और मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जैसा कि मैंने कहा, आदर्श रूप से मैं चाहूंगा कि दो टेस्ट मैचों की सीरीज के बजाय हमेशा तीन टेस्ट मैचों की सीरीज हो।"
--आईएएनएस
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