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पीएम विश्वकर्मा योजना ने 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य किया हासिल

पीएम विश्वकर्मा योजना ने 30 लाख लाभार्थियों का लक्ष्य किया हासिल
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नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। पीएम विश्वकर्मा योजना ने लॉन्च होने के तीन साल के भीतर ही 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इस योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण सहायता, डिजिटल प्रोत्साहन और बाजार से जुड़ाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह जानकारी बुधवार को जारी फैक्टशीट में दी गई।

इस योजना के तहत 24.37 लाख से अधिक कारीगरों को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 18.16 लाख से अधिक कारीगरों को टूलकिट प्रदान की गई हैं। वहीं, लाभार्थियों को कच्चा माल खरीदने, औजारों को अपग्रेड करने और कारोबार का विस्तार करने में मदद के लिए करीब 5,316 करोड़ रुपए के 6.19 लाख से अधिक ऋण मंजूर किए गए हैं।

वहीं, 8.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्रोत्साहन मिला है, जिसके तहत 42 करोड़ रुपए से अधिक वितरित किए जा चुके हैं।

ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर 12,000 से अधिक कारीगरों को भी प्रशिक्षण दिया गया है।

बयान में कहा गया कि 30,000 से अधिक विश्वकर्मा लाभार्थियों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम), ओएनडीसी, मीशो, अमेजन, फैबइंडिया, सुलेखा आदि विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है।

देशभर में 1,500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम और शिविर, 50 से अधिक कार्यशालाएं, 82 व्यापार मेले, 37 राज्य स्तरीय प्रदर्शनियां और 50 से अधिक फ्लैश मॉब आयोजित किए गए हैं।

भारत के पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार हाथों के कौशल, परिवार आधारित ज्ञान और छोटे स्तर के उद्यमों पर निर्भर हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य ऐसे कारीगरों और शिल्पकारों को शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करना है। यह योजना गुरु-शिष्य परंपरा या पारंपरिक कौशल की परिवार आधारित प्रथा को मजबूत और संरक्षित करने का भी प्रयास करती है।

पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र के माध्यम से मान्यता दी जाती है।

कौशल उन्नयन के माध्यम से लाभार्थियों को आधुनिक औजारों, बेहतर कार्यप्रणालियों और नए डिजाइन से परिचित कराया जाता है। प्रशिक्षण में डिजिटल लेनदेन, मार्केटिंग और उद्यमिता से जुड़ा ज्ञान भी शामिल है।

योजना के तहत बुनियादी प्रशिक्षण 5 से 7 दिनों का होता है, जबकि उन्नत प्रशिक्षण 15 दिन या उससे अधिक समय में पूरा किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को प्रतिदिन 500 रुपए का स्टाइपेंड दिया जाता है।

मार्केटिंग सहायता में व्यापार मेले, प्रदर्शनियां, ब्रांडिंग और जीईएम जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, विज्ञापन और प्रचार शामिल हैं। इसका उद्देश्य कारीगरों को औपचारिक कारोबारी तौर-तरीके अपनाने और व्यापक बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

—आईएएनएस

एबीएस