नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को अमेरिका के शिकागो में आयोजित एक उच्चस्तरीय बिजनेस गोलमेज बैठक में वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं को भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक कंपनियां जब अपनी आपूर्ति शृंखलाओं और निवेश रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं, ऐसे समय में भारत उन्हें बाजार, प्रतिभा, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और निरंतर सुधारों का अनूठा संयोजन प्रदान करता है।
बैठक को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, सुधार-आधारित नीतियों और दीर्घकालिक निवेश अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक कंपनियों को भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे ऐसे मंच के रूप में अपनाना चाहिए जहां वे विनिर्माण कर सकें, नवाचार विकसित कर सकें और पूरी दुनिया के लिए उत्पाद एवं सेवाएं तैयार कर सकें।
सीतारमण ने कहा कि "भारत में विनिर्माण, भारत के लिए और दुनिया के लिए" की अवधारणा आज की वैश्विक आर्थिक जरूरतों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस और ऐडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
"भारत ही क्यों, अभी क्यों" विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल घरेलू बाजार, मजबूत उपभोक्ता मांग, निवेश-आधारित विकास मॉडल, व्यापक आर्थिक स्थिरता, कुशल मानव संसाधन और तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल तथा भौतिक अवसंरचना (फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) नेटवर्क है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की निवेश क्षमता किसी एक क्षेत्र पर आधारित नहीं है, बल्कि पिछले एक दशक में विकसित हुई अनेक संरचनात्मक ताकतों का परिणाम है। यही कारण है कि भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक विकास साझेदार के रूप में उभर रहा है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई के क्षेत्र का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत ने आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी और इंडिया स्टैक जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म को आबादी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया है। इन पहलों ने वित्तीय समावेशन, डिजिटल लेनदेन और सेवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव लाया है।
उन्होंने कहा कि अब अगला अवसर एआई, इंजीनियरिंग, विश्लेषण, उत्पाद विकास, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-मूल्य क्षेत्रों में नए व्यवसाय विकसित करने का है। उनके अनुसार, भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) अब केवल सेवा केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वैश्विक नवाचार केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं।
वित्त मंत्री ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों को गिफ्ट सिटी में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए भी आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) में 1,250 पंजीकृत संस्थाएं कार्यरत थीं।
उन्होंने कहा कि गिफ्ट आईएफएससी तेजी से एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में उभर रहा है, जो वैश्विक पूंजी को भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों से जोड़ता है। बैंकिंग, फंड मैनेजमेंट, पुनर्बीमा, विमान एवं जहाज लीजिंग, सतत वित्त और अन्य सीमा-पार वित्तीय सेवाओं के क्षेत्रों में यहां व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
विनिर्माण क्षेत्र पर बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन से भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर पैदा हुआ है। विशाल घरेलू बाजार, प्रतिस्पर्धी उत्पादन क्षमताएं, कुशल कार्यबल और नीतिगत समर्थन भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने निवेशकों से भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने का आग्रह करते हुए कहा कि देश आर्थिक सुधारों, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विस्तार के माध्यम से आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास का एक प्रमुख इंजन बनने की क्षमता रखता है।
--आईएएनएस
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