नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। आयुष मंत्रालय के सेक्रेटरी वैद्य राजेश कोटेचा के अनुसार, स्टैंडर्ड हेल्थ टर्मिनोलॉजी को शामिल करने से आयुष इंटरवेंशन बड़े डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम का एक जरूरी हिस्सा बनेंगे, जो मॉडर्न हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स स्टैंडर्ड से मेल खाएंगे।
आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी सिस्टम के लिए डब्ल्यूएचओ-आईसीएचआई फ्रेमवर्क पर पांच दिन की वर्कशॉप शुरू की है, जो भारत के पारंपरिक मेडिसिन सिस्टम को ग्लोबल डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम और यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज फ्रेमवर्क में जगह दिलाने की दिशा में एक जरूरी कदम है।
कोटेचा ने कहा कि यह पहल सिर्फ एक कोडिंग एक्सरसाइज से कहीं ज्यादा है। उन्होंने उद्घाटन सेशन में कहा, "यह भारत के पारंपरिक मेडिकल सिस्टम को ग्लोबल साइंटिफिक, डिजिटल और पॉलिसी इकोसिस्टम में जगह दिलाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है।"
आयुष मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी डॉ. कविता जैन ने पारंपरिक तरीकों को डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और ग्लोबल हेल्थ सिस्टम में शामिल करने के लंबे समय के पॉलिसी असर के बारे में विस्तार से बताया। जीटीएमसी जामनगर की यूनिट हेड डॉ. गीता कृष्णन ने वैश्विक परिचालन संदर्भ साझा किया, साथ ही डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधियों डॉ. रॉबर्ट जैकब, डेटा मानक और सूचना विज्ञान टीम के नेता और डॉ. स्टीफन एस्पिनोसा, सलाहकार, डब्ल्यूएचओ ने भी प्रमुख भाषण दिए, जिन्होंने वैश्विक अंतरसंचालनीयता और डिजिटल सूचना विज्ञान के साथ संरेखण पर ध्यान केंद्रित किया।
कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) द्वारा अपने विश्व स्वास्थ्य संगठन सहयोग केंद्र, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (एनआईआईएमएच), हैदराबाद, के माध्यम से किया जा रहा है।
यह आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (एएसयू) प्रणालियों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड (एनएचआईसी) के वैज्ञानिक रूप से मजबूत, स्तरित पदानुक्रम को अंतिम रूप देने के लिए प्रमुख वैज्ञानिक विशेषज्ञों, संस्थागत प्रमुखों और अंतर्राष्ट्रीय सूचना विज्ञान पेशेवरों को एक साथ लाता है। बयान में कहा गया है कि सिद्ध के लिए 25 स्पेशलिटी, 130 थेरेपी और 996 प्रोसिजर हैं। यूनानी के लिए 15 स्पेशलिटी, 179 थेरेपी और 551 प्रोसिजर हैं।
--आईएएनएस
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