नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की विकास दर वित्त वर्ष 27 में औसत 7.3 प्रतिशत रह सकती है और इसे मजबूत कैपिटल इनफ्लो से सहारा मिलेगा। यह बयान डीबीएस बैंक में अर्थशास्त्री राधिका राव ने मंगलवार को दिया।
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 27 की शुरुआत मजबूती से की है। इस दौरान पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जिसे मजबूत घरेलू मांग, खपत, सरकारी पूंजीगत व्यय और मैन्युफैक्चरिंग का सहारा मिला।
डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव ने कहा, "जीएसटी कलेक्शन, ई-वे बिल, बिजली की मांग और डिजिटल पेमेंट जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर मजबूत बने हुए हैं। हालांकि, वित्त वर्ष27 की दूसरी छमाही में विकास दर के धीमे होने की उम्मीद है, क्योंकि मुश्किल वित्तीय हालात, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और बड़ा आधार अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर असर डालेंगे।"
अगस्त में महंगाई दर बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। चीनी, दूध, प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों और खाने के तेल जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने से यह दबाव बना।
औसत से कम मानसूनी बारिश और अल-नीनो का बढ़ता खतरा आने वाली फसल की पैदावार पर दबाव डाल सकता है।
राव के अनुसार, इन हालात को देखते हुए उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में हेडलाइन महंगाई दर 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी, जिससे मॉनेटरी पॉलिसी का मुख्य ध्यान महंगाई से जुड़े जोखिमों पर रहेगा।
इसके अलावा, विदेशी मुद्रा के आने में तेजी से बढ़ोतरी ने भारत के बाहरी बफर को मज़बूत किया है, लेकिन इससे लिक्विडिटी मैनेजमेंट की एक बड़ी चुनौती भी पैदा हुई है।
आरबीआई की स्पेशल स्वैप विंडो के जरिए 143 अरब डॉलर जुटाए गए हैं, जिसमें एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट के जरिए जुटाए गए 133 अरब डॉलर भी शामिल हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार 780 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है।
अर्थशास्त्री का कहना है कि साथ ही, बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी तेजी से बढ़ी है। इसलिए, अतिरिक्त लिक्विडिटी और यील्ड पर इसके असर को मैनेज करने के लिए वीआरआरआर और ओपन-मार्केट ऑपरेशन जैसे उपाय करने की जरूरत है।
डीबीएस को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 27 में करंट अकाउंट घाटा जीडीपी का लगभग 1.1 प्रतिशत रहेगा, जबकि कैपिटल इनफ्लो की वजह से बैलेंस ऑफ पेमेंट(बीओपी) अधिशेष में रह सकता है।
--आईएएनएस
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