नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। सरकार की 28,840 करोड़ रुपए की संशोधित उड़ान योजना का उद्देश्य देश के अधिक से अधिक क्षेत्रीय शहरों को हवाई संपर्क से जोड़ना है। इस योजना के तहत भारत के विमानन क्षेत्र में एक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में 100 नए हवाई अड्डों और 200 आधुनिक हेलीपैड के निर्माण की परिकल्पना की गई है।
सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी एक फैक्टशीट के मुताबिक, देश के एयरमैप पर और अधिक क्षेत्रीय शहरों को लाने के लिए 28,840 करोड़ रुपए के बजट के साथ शुरू की गई संशोधित उड़ान स्कीम का लक्ष्य भारत में एविएशन के क्षेत्र में एक और बड़े बदलाव के तहत 100 नए एयरपोर्ट और 200 आधुनिक हेलीपैड बनाना है।
इससे पहले अक्टूबर 2016 में शुरू की गई क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस)–उड़ान आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी। इस योजना ने देश के अल्प-सेवित और असेवित क्षेत्रों तक हवाई संपर्क का विस्तार भी किया। आज भारत घरेलू विमानन बाजार के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। पिछले एक दशक में देश में संचालित हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 15 जुलाई तक 165 हो गई है।
नए चरण में संशोधित उड़ान स्कीम एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, ऑपरेशनल सपोर्ट में सुधार और छोटे मार्केट में सेवा देने वाले एयरलाइन ऑपरेटरों के लिए एक बेहतर इकोसिस्टम बनाने पर ज्यादा जोर देते हुए इस विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। फैक्टशीट में बताया गया है कि इसका मकसद पहले मिली सफलताओं को मजबूत करना और नई जरूरतों को पूरा करना है।
छोटे मार्केट में एयरलाइन ऑपरेटरों को पर्याप्त सपोर्ट सिस्टम की जरूरत होती है। कई इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियां मुश्किल होती हैं। ऐसे इलाकों में, हेलीपैड और खास तरह के एयरक्राफ्ट जरूरी सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाते हैं। इसलिए, रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम – संशोधित उड़ान को इन जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मजबूत और भविष्य की सोच वाले फ्रेमवर्क के तौर पर डिजाइन किया गया है।
एयरड्रोम का विकास संशोधित उड़ान स्कीम का एक मुख्य हिस्सा है। इसके तहत अगले आठ वर्षों में पूरे देश में एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने के लिए मौजूदा बिना सेवा वाले एयरस्ट्रिप से 100 एयरपोर्ट विकसित करने के लिए कुल 12,159 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया है।
छोटे एयरड्रोम का टिकाऊपन लगातार ऑपरेशन पर निर्भर करता है। इसलिए संशोधित उड़ान स्कीम तीन साल की अवधि के लिए व्यवस्थित ऑपरेशन और मेंटेनेंस सपोर्ट देती है। इसकी सीमा प्रति एयरपोर्ट प्रति वर्ष 3.06 करोड़ रुपए और प्रति हेलीपोर्ट या वॉटर एयरड्रोम प्रति वर्ष 0.90 करोड़ रुपए तय की गई है। इस हिस्से की अनुमानित लागत 2,577 करोड़ रुपए है और इससे देशभर में लगभग 441 हवाई अड्डों को मदद मिलने की उम्मीद है।
देश के कई हिस्सों में भौगोलिक बाधाओं के कारण पारंपरिक हवाई अड्डा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना हमेशा संभव नहीं होता है। मॉडिफाइड उड़ान स्कीम में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने का प्रस्ताव है, जहां कनेक्टिविटी की कमी अभी भी बड़ी समस्या है। इन सुविधाओं से हेल्थकेयर तक पहुंच बेहतर होने, इमरजेंसी रिस्पॉन्स ऑपरेशन में मदद मिलने और प्रशासनिक व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हर हेलीपैड की अनुमानित लागत 15 करोड़ रुपए है। इस हिस्से के लिए आठ वर्षों में कुल 3,661 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान है।
एयरलाइन ऑपरेटरों की मदद करने और छोटे बाजारों में रूट डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए, यह स्कीम 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (वीजीएफ) का प्रावधान जारी रखती है। मॉडिफाइड उड़ान फ्रेमवर्क के तहत, दस वर्षों की अवधि में वीजीएफ के लिए कुल 10,043 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया गया है।
एयरलाइंस को पांच साल तक फंडिंग सपोर्ट मिलेगा। तीसरे साल से फंडिंग धीरे-धीरे कम करने का सिस्टम शुरू होगा, जबकि रूट पर एक्सक्लूसिविटी (विशेष अधिकार) तीन साल तक ही रहेगी। इस स्ट्रक्चर का मकसद बाजार के विकास और कमर्शियल सस्टेनेबिलिटी (व्यावसायिक रूप से आत्मनिर्भर बनने) की ओर धीरे-धीरे बढ़ने के बीच संतुलन बनाना है।
संशोधित उड़ान योजना में 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत घरेलू एविएशन क्षमता को मजबूत करने पर भी खास जोर दिया गया है। इस स्कीम में पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और अलायंस एयर के लिए दो एचएएल डॉर्नियर विमानों का प्रस्ताव है। ये विमान मुश्किल हालात में भी प्रभावी ढंग से काम करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
--आईएएनएस
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