
हरिद्वार जनपद में अवैध रूप से संचालित चिकित्सालयों और स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को सख्त कार्रवाई करते हुए व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश कुंवर के नेतृत्व में गठित टीम ने जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और स्वास्थ्य केंद्रों का सघन निरीक्षण किया।
निरीक्षण अभियान के दौरान टिबडी स्थित श्री राम क्लिनिक अंबेडकर पार्क जो कि किसी हिमांशु प्रकाश के नाम से खोला गया क्लिनिक पर एक झोलाछाप चिकित्सक द्वारा संचालित , सेठी नर्सिंग होम कनखल, आस्था मेडिकल एंड क्लिनिक कनखल, क्लासिक हॉस्पिटल धनपुरा, वेलफेयर हॉस्पिटल धनपुरा, गैलेक्सी हॉस्पिटल धनपुरा, एडवांस्ड हेयर ग्रो रानीपुर तथा सोनकली हेल्थ केयर सेंटर जगजीतपुर की जांच की गई।
जांच के दौरान कई संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने श्री राम क्लिनिक, आस्था मेडिकल एंड क्लिनिक तथा गैलेक्सी हॉस्पिटल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। वहीं वेलफेयर हॉस्पिटल, क्लासिक हॉस्पिटल और सेठी नर्सिंग होम में भी विभिन्न कमियां पाए जाने के बाद इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बताते चले कि श्री राम क्लीनिक अंबेडकर पार्क के सामने टिबडी वार्ड 17 नगर निगम की शिकायत एक वर्ष पूर्व की गई थी कि उस पर बैठने वाला चिकित्सक झोलाछाप है इस बात की जांच सीएमओ डॉ आरके सिंह द्वारा कराई जा रही थी। उसी क्रम मे श्री राम क्लीनिक सील किया गया है पूर्व में भी उक्त क्लिनिक डॉक्टर सरोजिनी नैथानी ने सील किया था। जो कि स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से 6 महीने बाद ही खोल दिया गया था लेकिन इस बार दूसरे के नाम से क्लिनिक संचालित था
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश कुंवर ने बताया कि संबंधित संस्थानों में पाई गई अनियमितताओं के आधार पर 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इसके अलावा नियमानुसार अन्य कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।उन्होंने कहा कि जनपद में अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसी क्रम में बहादराबाद, भगवानपुर, रुड़की, लक्सर और मंगलौर सहित अन्य विकासखंडों में भी संबंधित ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों के माध्यम से सघन निरीक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना आवश्यक मानकों और अनुमति के संचालित होने वाले चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के विरुद्ध भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

