नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की दावेदारी को लेकर राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि भारत आज दुनिया की एक प्रमुख शक्ति बन चुका है। भारत आज उत्तर और दक्षिण, साथ ही पूर्व और पश्चिम के देशों के बीच एक मजबूत पुल का काम कर रहा है।
आईएएनएस से बात करते हुए हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि भारत आज दुनिया की उन प्रमुख ताकतों में से एक है जिसकी पहचान सिर्फ अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में है। आज दुनिया के बड़े देशों के बीच भारत की अहमियत काफी बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 और 'ब्रिक्स' जैसी बड़ी बैठकों में बुलाया जाता है। भारत आज उत्तर और दक्षिण, साथ ही पूर्व और पश्चिम के देशों के बीच एक मजबूत पुल का काम कर रहा है।
हर्षवर्धन ने कहा कि हमारे पश्चिमी देशों के साथ अच्छे रिश्ते हैं, लेकिन साथ ही हम कई मामलों में ग्लोबल साउथ की आवाज भी बनकर सामने आते हैं। ऐसे में जरूरी है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का नियमित हिस्सा बना रहे। जो भी बड़े देश सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने की कोशिश कर रहे हैं, वे समय-समय पर इसके अस्थायी सदस्य भी चुने जाते रहे हैं। इस लिहाज से भारत का रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है। हम 2011-12 में सुरक्षा परिषद के सदस्य रहे, फिर 2021-22 में भी रहे और अब 2028-29 के कार्यकाल के लिए फिर से चुनाव लड़ेंगे। यानी हर कुछ साल बाद भारत फिर से सुरक्षा परिषद में अपनी जगह बनाता है।
उन्होंने कहा कि एशिया एक बड़ा क्षेत्र है, इसलिए कई देशों को मौका देना पड़ता है। इसके बावजूद भारत लगातार यह सुनिश्चित करता रहा है कि उसे नियमित रूप से सुरक्षा परिषद का सदस्य चुना जाए। इससे दो बड़े फायदे होते हैं। दुनिया में भारत की अहमियत हमेशा बनी रहती है। भारत हमेशा शांति, तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान की वकालत की है। इसलिए यह जरूरी है कि भारत अपने विचार उस मंच पर रखे, जिसे दुनिया अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानती है।
राज्यसभा सांसद श्रृंगला ने कहा कि यह भी याद रखना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र का ऐसा एकमात्र निकाय है, जिसके फैसले सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से मानने जरूरी होते हैं। खास तौर पर चैप्टर-सात के तहत पारित प्रस्ताव सभी सदस्य देशों पर लागू होते हैं। इसी वजह से सुरक्षा परिषद में भारत की मौजूदगी बहुत महत्वपूर्ण है। यह दुनिया में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव को भी दिखाती है। हमारे लिए यह जरूरी है कि हमारी सोच और हमारा पक्ष सुरक्षा परिषद तक पहुंचे।
उन्होंने कहा, "इसके अलावा, सुरक्षा परिषद की सदस्यता भारत के इस दावे को भी और मजबूत करती है कि उसे सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए। साथ ही, परिषद का सदस्य होने से भारत को सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को आगे बढ़ाने का भी बेहतर मौका मिलता है।"
--आईएएनएस
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