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अमेरिका भारत के साथ निवेश बढ़ाने के ल‍िए इच्छुक: क्रिस पिलकर्टन

अमेरिका

ऐशविले, 31 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिका भारत के साथ निवेश संबंधों को और मजबूत करना चाहता है और भारतीय कंपनियों को उसके राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया को समझने और उसमें आगे बढ़ने में मदद करने के लिए भी तैयार है। यह बात अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक से पहले कही।

आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस पिलकर्टन ने कहा कि वह भारतीय अधिकारियों और कंपनियों के साथ संभावित निवेश अवसरों पर बातचीत का स्वागत करते हैं।

उन्होंने कहा, "मैं भारतीय अधिकारियों और भारतीय कंपनियों से मिलने का अवसर चाहता हूं, ताकि हम देख सकें कि कमेटी ऑन फॉरेन इन्वेस्टमेंट इन द यूनाइटेड स्टेट्स (सीएफआईयूएस) प्रक्रिया के जरिए साथ मिलकर काम करने के कौन-कौन से रास्ते हो सकते हैं।"

सीएफआईयूएस अमेरिका में होने वाले कुछ विदेशी निवेशों की समीक्षा करती है और यह जांचती है कि उनका अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा।

पिलकर्टन ने कहा कि यह समिति हर निवेश का अलग-अलग आधार पर मूल्यांकन करती है और केवल इस आधार पर फैसला नहीं करती कि निवेश किस देश से आ रहा है।

उन्होंने कहा, "अमेरिका में विदेशी निवेश की समीक्षा करने वाली समिति इस बात से प्रभावित नहीं होती कि पूंजी किस देश से आ रही है। हम हर मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से अलग-अलग मूल्यांकन करते हैं।"

पिलकर्टन के मुताबिक, समिति की ओर से समीक्षा किए जाने वाले लगभग 90 प्रतिशत लेन-देन को मंजूरी मिल जाती है। कुछ मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने के बाद अनुमति दी जाती है।

उन्होंने कहा कि मंजूर किए गए विदेशी निवेश अमेरिकी समुदायों के लिए आर्थिक विकास, रोजगार के अवसर और स्थानीय व्यवसायों और उद्यमियों के लिए नए मौके पैदा कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, "हम अपने सहयोगी देशों और साझेदारों के साथ मिलकर निवेश के अवसर बढ़ाना चाहते हैं। सिर्फ नई तकनीकों में ही नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों में भी। हम साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं और निवेश प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझाना चाहते हैं।"

भारत की वैश्विक आर्थिक विकास में भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में पिलकर्टन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अपने 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे पर काम कर रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका अकेले आगे बढ़ना चाहता है।

उन्होंने कहा, "यह अमेरिका 'फर्स्ट प्रशासन' है और हमारा फोकस 'अमेरिका फर्स्ट' पर है, लेकिन जैसा राष्ट्रपति ट्रंप कह चुके हैं, इसका मतलब अमेरिका अकेले नहीं है। हम कई देशों के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।"

पिलकर्टन ने यह बताने से इनकार किया कि एशविल में होने वाली जी20 बैठक से अमेरिका भारत से कौन-से विशेष आर्थिक परिणामों की उम्मीद कर रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास सभी देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है।

उन्होंने कहा, "मैं भारत से जुड़े किसी विशेष मुद्दे पर टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि आर्थिक विकास सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।"

उन्होंने भारत को 'एक महत्वपूर्ण साझेदार' बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच 'बेहतरीन संबंध' विकसित हुए हैं।

एशविल में होने वाली चर्चाओं में वैश्विक आर्थिक विकास, व्यापार असंतुलन, मजबूत सप्लाई चेन और निवेश जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

पिलकर्टन ने कहा कि यह बैठक देशों को यह समझने का अवसर देगी कि वे आपसी सहयोग को कैसे बढ़ा सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि व्यापारिक साझेदारियां प्रभावी और निष्पक्ष बनी रहें।

उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी, हाइपरसोनिक तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा होंगे।

उनके अनुसार, अमेरिका इन क्षेत्रों में अपने साझेदार देशों के साथ सुरक्षित सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि संवेदनशील तकनीकों का गलत या दोहरे उपयोग न हो।

हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देश महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों, सुरक्षित सप्लाई चेन, निवेश और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

--आईएएनएस

एवाई/पीएम