वाशिंगटन, 18 सितंबर (आईएएनएस)। वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्ल्यूयूसी) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में उइगरों के कथित नरसंहार और मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाने की अपील की है। संगठन ने यह अपील चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को होने वाली अमेरिका यात्रा से पहले की है।
डब्ल्यूयूसी के मुताबिक, अमेरिका ने पहली बार 19 जनवरी 2021 को शिनजियांग में बिगड़ती स्थिति को ‘नरसंहार’ के तौर पर औपचारिक रूप से मान्यता दी थी। संगठन ने कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग ने भी शी जिनपिंग की यात्रा से कुछ सप्ताह पहले 10 सितंबर को जारी एक आधिकारिक बयान में इस रुख को दोहराया है।
डब्ल्यूयूसी के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलावदुन ने कहा, “शी की वाशिंगटन यात्रा उइगर नरसंहार की निंदा के शब्दों से आगे बढ़ने का रणनीतिक अवसर है। अमेरिका उइगर लोगों का मजबूत और मुखर सहयोगी रहा है और डोनाल्ड ट्रंप को इस अवसर का इस्तेमाल इसे साबित करने के लिए करना चाहिए।”
संगठन ने आरोप लगाया कि चीन के अधिकारियों ने दमन के तरीकों में बदलाव किया है, लेकिन हिरासत में लिए गए और लापता हुए लाखों लोगों का अब भी कोई पता नहीं है।
डब्ल्यूयूसी ने कहा कि हाल के वर्षों में श्रम हस्तांतरण कार्यक्रमों में वृद्धि हुई है, जिसके तहत उइगर श्रमिकों को जबरन विस्थापित किया जा रहा है और उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। संगठन ने यह भी दावा किया कि ‘एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेसिव लॉ’ के लागू होने के बाद धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की बुनियादी अभिव्यक्तियों को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
डब्ल्यूयूसी ने चीन पर विदेशों में रह रहे उइगर समुदायों को निशाना बनाने और उनकी गतिविधियों को बाधित करने का भी आरोप लगाया। संगठन के अनुसार, विशेष रूप से अमेरिका में रह रहे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिशें की जा रही हैं।
संगठन ने अमेरिकी प्रशासन से अपील की कि वह शी जिनपिंग और अन्य चीनी अधिकारियों के साथ वाशिंगटन में होने वाली बातचीत के दौरान उइगरों के मुद्दे को ठोस और प्रभावी तरीके से उठाए। डब्ल्यूयूसी ने अमेरिकी नेतृत्व से बीजिंग से उइगरों के खिलाफ कथित “नरसंहार और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों” को रोकने तथा चीन के मानवाधिकार संबंधी दायित्वों का सम्मान करने की मांग करने को कहा।
डब्ल्यूयूसी ने अमेरिका से चीन की कथित सीमा-पार दमन की नीतियों को खत्म करने का दबाव बनाने की भी अपील की, खासकर अमेरिकी क्षेत्र में। संगठन ने कहा कि इससे अमेरिका में रह रहे उइगर, तिब्बती, हांगकांग और चीनी प्रवासी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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