'धमकी के आगे अपनी गरिमा और आजादी से कभी समझौता नहीं करता ईरान', पेजेश्कियन का बयान

'धमकी के आगे अपनी गरिमा और आजादी से कभी समझौता नहीं करता ईरान', पेजेश्कियन का बयान

तेहरान, 18 जून (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन को ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह देश की स्वतंत्रता, गरिमा और कूटनीतिक सफलता का प्रतीक है। यह बताता है क‍ि ईरान ने कभी धमकी या दबाव में आकर अपनी गरिमा और आजादी से समझौता नहीं किया।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में कहा, ''यह संदेश उस देश की आवाज को दिखाता है जिसने किसी भी धमकी या दबाव के सामने अपनी गरिमा और आजादी से समझौता नहीं किया। आज जो फैसला दर्ज किया गया है, वह देश के लोगों के धैर्य, समझदारी भरी राजनीति और जिम्मेदार कूटनीति का नतीजा है।''

ईरान के राष्ट्रपति ने कहा क‍ि अमेर‍िका-ईरान समझौता एक ऐतिहासिक दस्तावेज है और एक शक्तिशाली ईरान का संदेश है, जो यह बताता है क‍ि शांति आपसी सम्मान की भावना में ही हासिल होगी।

ईरान का इस्लामी गणराज्य हमेशा से दुनिया में शांति बनाए रखने, अपनी गरिमा और स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने, साथ ही विकास और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी संघर्ष के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में अपने समकक्ष इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

समझौते में होर्मुज से नाकेबंदी हटाना, मिलिट्री एक्शन पर नकेल कसना (लेबनान का भी जिक्र है), संप्रभुता का सम्मान करना, ईरान पर से संयुक्त राष्ट्र और आईएईए आदि संगठनों से प्रतिबंध हटाने जैसी बातें शामिल हैं।

फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हुई एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कई बार इस समझौते को बड़ी सफलता बताया। उनका कहना था कि यह सैन्य दबाव और कूटनीति, दोनों के मेल से संभव हो पाया।

ट्रंप ने कहा, “रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।”

उन्होंने कहा क‍ि मौजूदा संघर्ष को खत्म करना, होर्मुज स्‍ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही हमारा मुख्य उद्देश्य था।”

ट्रंप का कहना था कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होते।

--आईएएनएस

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