न्यूयॉर्क, 30 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संगठन बिना किसी धार्मिक भेदभाव के लोगों की सेवा करता है। उन्होंने अरब देशों के दो विमानों से जुड़ी एक हवाई दुर्घटना के दौरान संगठन की ओर से की गई मदद का उदाहरण दिया, जिनमें ज्यादतर यात्री मुस्लिम थे।
न्यूयॉर्क में धार्मिक नेताओं की "एक दुनिया, एक मानवता" सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि समुदायों के बीच बातचीत के साथ-साथ सेवा भी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "बातचीत पहला कदम है। सेवा दूसरा कदम है। ऐसा नहीं है कि एक के बाद दूसरा कदम उठाया जाए। ये दोनों काम एक साथ शुरू होने चाहिए।"
भागवत ने कहा कि आरएसएस की शुरुआत से ही सेवा उसके काम का मुख्य हिस्सा रही है। स्वयंसेवक मदद चाहने वाले लोगों का धर्म या पहचान नहीं पूछते थे।
भागवत ने कहा, "शुरुआत से ही हम सेवा कर रहे हैं। सेवा करते समय हम कोई भेदभाव नहीं करते। जिसे भी जरूरत होती है, हम उसकी सेवा करते हैं।"
उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से आरएसएस के स्वयंसेवक अलग-अलग स्तर के 1,30,000 सेवा कार्य चला रहे हैं। भागवत ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए हरियाणा में हुए दो विमानों की टक्कर का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक घटनास्थल पर पहुंचे और विमान में सवार लोगों के धर्म की परवाह किए बिना मदद की। दोनों विमान अरब देशों के थे और ज्यादातर यात्री मुसलमान थे।"
भागवत ने बताया कि स्वयंसेवकों ने बचे हुए कुछ लोगों का इलाज किया, शवों को बाहर निकाला, अंतिम संस्कार की व्यवस्था में मदद की और बाद में पीड़ितों की पहचान करने में उनके रिश्तेदारों की सहायता की।
उन्होंने कहा, "उस समय हमने कभी नहीं सोचा कि ये मुसलमान हैं। हम ऐसा इसलिए कर सके क्योंकि हम राजनीति में नहीं हैं। हम ऐसा करते हैं। हम सिर्फ देते हैं। हमें कुछ नहीं चाहिए।"
भागवत ने माना कि आरएसएस के बारे में लोगों की कुछ धारणाएं बन गई हैं, क्योंकि संगठन ने अपने ज्यादातर कामों का प्रचार-प्रसार नहीं किया है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे संगठन के बारे में कोई राय बनाने से पहले उसे अंदर से देखें और समझें।
उन्होंने कहा, "इसीलिए प्रचार-प्रसार के मामले में हम काफी पीछे हैं। गलत बातों और धारणाओं की वजह से कई तरह की गलतफहमियां पैदा हो गई हैं। लेकिन जब आप आकर हमें अंदर से देखेंगे, तो वे सारी गलतफहमियां एक ही दिन में दूर हो जाएंगी।"
भागवत ने कहा कि सेवा का काम मदद पाने वालों में भी बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि "ऐसे प्रोजेक्ट्स की मदद से मुश्किल हालात से उबरने वाले लोग अक्सर बाद में खुद ही दूसरों की मदद करने के लिए लौट आते हैं, बिना किसी के कहे।"
कुछ लाभार्थियों की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा, "इस प्रोजेक्ट ने मुझे बहुत कुछ दिया है। अब मुझे भी कुछ वापस देना है। हम उन्हें ऐसा करने के लिए कहते नहीं हैं। लेकिन यह भावना अपने आप पैदा होती है।"
भागवत ने धार्मिक नेताओं से आग्रह किया कि वे अपने देशों में निस्वार्थ सेवा के ऐसे ही उदाहरण पेश करें और लगातार बातचीत के जरिए आपस में जुड़ें।
बता दें कि 1996 में हरियाणा के हुई चरखी दादरी में हवा में सऊदी अरब एयरलाइंस का एक विमान और कजाकिस्तान एयरलाइंस के विमान टकरा गए थे। एविएशन के इतिहास की सबसे घातक हवाई टक्करों में से एक इस घटना में दोनों विमानों में सवार सभी 349 लोगों की मौत हो गई थी।
आरएसएस की स्थापना 1925 में नागपुर में के.बी. हेडगेवार ने की थी और 2025 में इसने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे किए। इस संगठन का पूरे देश में वॉलंटियर्स का नेटवर्क है, जबकि इससे जुड़े संगठन शिक्षा, समाज सेवा, मज़दूर और आदिवासी कल्याण जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं।
--आईएएनएस
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